AdministrationBreaking NewsBusinessChandigarhCityCrimeDevlopmentFeaturedGovernmentIndiaPunjab GovernmentPunjab HotmailPunjab PolicePunjab Vigilanceअपराध समाचारजालंधरपंजाबराज्य समाचारलुधियाना

PSPCL के पूर्व CMD समेत 3 गिरफ्तार: विजिलेंस ब्यूरो का बड़ा एक्शन, करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व अफसर और कॉलोनाइज़र पर शिकंजा!

Spread the love

#PunjabNews #VigilanceBureau #PSPCL #CorruptionCase #KDChaudhary #LudhianaNews #BreakingNews #PunjabVigilance #ElectricityScam #AmitGarg #SanjeevPrabhakar #PunjabPolitics #LatestNews #CrimeNews #PunjabGovernment #VBAction

Punjab Hotmail, लुधियाना/चंडीगढ़। लुधियाना में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की आर्थिक अपराध शाखा ने भ्रष्टाचार के बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए PSPCL के पूर्व CMD K.D. चौधरी, पूर्व सीनियर XEN संजीव प्रभाकर और M/s दामिनी रिसॉर्ट एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है।

तीनों आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस जांच संख्या 05 (10 मई 2021) के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।

66 KV सबस्टेशन को लेकर हुआ बड़ा खेल

विजिलेंस के अनुसार बसंत एवेन्यू कॉलोनी में 66 KV सबस्टेशन स्थापित करने के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

आरोप है कि कॉलोनाइज़र ने PSPCL के फील्ड अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपनी कॉलोनी में 1015 वर्ग गज जमीन पर सबस्टेशन स्थापित करवा लिया, जिससे कॉलोनी को सीधा फायदा पहुंचा।

जांच में सामने आया कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा कॉलोनाइज़र की सभी कॉलोनियों की NOC और कुल बिजली लोड की सही जांच की जाती, तो पूरे सबस्टेशन का खर्च कॉलोनाइज़र को खुद उठाना पड़ता। लेकिन कथित मिलीभगत के चलते नियमों को नजरअंदाज किया गया।

बिजली मंत्रालय के नियमों की अनदेखी

विजिलेंस प्रवक्ता के मुताबिक सबस्टेशन स्थापित करते समय बिजली मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह 66 KV सबस्टेशन खेतों के बीच बनाया गया, जहां तक पहुंचने के लिए आज तक कोई पक्की सड़क मौजूद नहीं है।

पाखोवाल लिंक रोड से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित इस सबस्टेशन तक पहुंचने में भारी दिक्कतें हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण तथ्य का जिक्र न तो प्रस्ताव में किया गया और न ही अधिकारियों की ऑफिस नोटिंग में।

इसके बावजूद तत्कालीन CMD K.D. चौधरी ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

जांच में जुटी विजिलेंस टीम

विजिलेंस ब्यूरो का कहना है कि तत्कालीन XEN संजीव प्रभाकर और अन्य अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी देते समय कई तकनीकी और प्रशासनिक कमियों को नजरअंदाज किया गया।

फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *