CBI की छापेमारी से जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के पुराने मामलों की कड़ियां फिर चर्चा में, रिश्तों और संपर्कों की जांच पर उठे सवाल! फ्लैट तक पहुंच गई टीमें?
जालंधर में भी हुई तलाशी; क्या पुराने ट्रस्ट मामलों से जुड़े लोगों के संपर्कों की भी होगी पड़ताल? विधानसभा टिकट को लेकर भी सियासी चर्चाएं तेज!
मनमोहन सिंह, पंजाब हॉटमेल ब्यूरो (जालंधर)। पंजाब में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मंगलवार को हुई कार्रवाई के बाद जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़े पुराने विवाद और कथित घोटाले भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। जांच टीमें फ्लैट तक पहुंच गई।

सीबीआई ने मुख्यमंत्री के विशेष ड्यूटी अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर सहित आठ ठिकानों पर तलाशी ली।
सीबीआई के अनुसार, जांच में अधिकारियों की नियुक्तियों, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, निविदाओं, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव तथा जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में कथित आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई का जालंधर से जुड़ा पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीबीआई ने शहर में भी आरोपियों से जुड़े परिसर की तलाशी ली है।
ऐसे में जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में पहले सामने आ चुके मामलों और उनसे जुड़े लोगों के कथित संपर्कों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, सीबीआई ने अभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का पुराना मामला उसकी आज दर्ज की गई एफआईआर का हिस्सा है। इसलिए दोनों मामलों को सीधे एक ही घोटाले से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जगतार सिंह संघेड़ा लंबे समय से ट्रस्ट से जुड़े कथित मामलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और शिकायतों के माध्यम से जांच की मांग करते रहे हैं।
अब सीबीआई की ताजा कार्रवाई के बाद उनके द्वारा पहले उठाए गए सवाल और संबंधित लोगों के आपसी संपर्क भी राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
ट्रस्ट से जुड़े पहले सामने आए सूर्या एन्क्लेव एक्सटेंशन भूमि अधिग्रहण मामले में 94.97 एकड़ जमीन से संबंधित मुआवजे में करीब 5.49 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच विजिलेंस ब्यूरो द्वारा की गई थी।
मामले में कथित फर्जी लाभार्थियों के नाम पर मुआवजा जारी करने, जाली दस्तावेज तैयार करने और ट्रस्ट अधिकारियों व अन्य लोगों की कथित मिलीभगत जैसे आरोप सामने आए थे।
इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुई थीं और बाद में एक पूर्व पीसीएस अधिकारी की भूमिका की भी जांच की गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ताजा सीबीआई जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज, फोन रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड अथवा प्रशासनिक फैसलों में जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़े पुराने मामलों की कोई प्रत्यक्ष कड़ी सामने आती है?
यदि किसी व्यक्ति का नाम दोनों मामलों में सामने आता भी है, तो सिर्फ व्यक्तिगत संबंध, दोस्ती या जान-पहचान अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं मानी जा सकती। किसी भी संभावित संबंध को स्थापित करने के लिए दस्तावेजी और जांच एजेंसी के प्रमाण जरूरी होंगे।
सीबीआई की एफआईआर में राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं।
एजेंसी ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा है। सीबीआई के मुताबिक जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच जारी है।
इस कार्रवाई के बाद जालंधर में एक और राजनीतिक सवाल भी चर्चा में है—पुराने मामलों से जुड़े राजनीतिक संपर्कों और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ेगा और विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट की संभावनाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इसका जवाब फिलहाल राजनीतिक अटकलों से आगे नहीं है। वास्तविक तस्वीर जांच आगे बढ़ने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
