जिमखाना क्लब चुनाव: सत्ता का संग्राम… डिक्टेटरशिप से डेमोक्रेसी तक, किन मुद्दों पर वोट मांग रहा प्रोग्रेसिव ग्रुप
दबाव और धमकियों के बीच कैसे सदस्यों की बीच अपनी बात रख लोकतंत्र बचाने के लिए चुनाव लड़ने की शक्ति को दर्शा रहा ग्रुप
मनमोहन सिंह, जालंधर। जालंधर जिमखाना क्लब चुनाव में सत्ता का संग्राम शुरु हो चुका है और उम्मीदवारों ने देर रात तक सदस्यों से मिलना-जुलना, फोन पर बात करना शुरु कर दिया है। चुनावी पारा हाई है क्योंकि कई आरोप ऐसे हैं जिसे एक पक्ष लगा रहा है और दूसरा मानने को तैयार नहीं।
इसका असर भी साफ दिख रहा है, जहां पहले लोग खुलकर समर्थन देते नजर आते थे अब सीधे बोलने से बच रहे हैं।

दूसरी तरफ प्रोग्रेसिव ग्रुप ने कहा कि ये चुनाव लोकतंत्र को बचाने के लिए हैं, पहले दूसरा ग्रुप निर्विरोध जीत रहा था क्योंकि बहुत कुछ हुआ था। लेकिन प्रोग्रेसिव पुराने और कुछ नए चेहरों के साथ फिर खड़ा हुआ और बता दिया कि ये आसान नहीं होगा।
ग्रुप के किंग मेकर कहे जाने वाले कमल शर्मा कोकी और संरक्षक दलजीत सिंह छाबड़ा जोकि जूनियर वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ रहे हैं कहते हैं इस बार जैसा चुनाव कभी नहीं हुआ और न होना चाहिए।
क्लब में राजनीति करने वालों ने सत्ता का गलत उपयोग करते हुए चुनाव प्रक्रिया को ही कब्जा लिया। हमने आवाज उठाई तो कुछ हद तक सुधार पर हमारी बात पर पूरी तरह से अमल नहीं हुआ।
अब हमारी लड़ाई डिक्टेटरशिप के खिलाफ है जो उम्मीदवारों और सदस्यों को डरा-धमका कर चुनाव जीतना चाहते हैं। हम पांच प्वाइंट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें ट्रांसपेरेंसी, इक्वलिटी, अकाउंटबिलिटी, रिस्पेक्ट और प्रोग्रेस शामिल है जो हमारी जीत का मूल मंत्र बनेगा।
क्लब में बदलाव उसके सदस्य लाएंगे जो डिक्टेटरशिप को कभी बर्दाश्त नहीं करते। यहां सभी की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए जो अब बहुत कम देखने को मिलता है।
