Gymkhana Club Election: इतिहास में पहली बार थिंक टैंक मैदान से गायब, क्या राजनीति से परे हो सकते है पारदर्शी चुनाव? बिना मेनीफेस्टों के चुनाव से सदस्य कर रहे किनारा!
दिग्गजों की दूरी ने छेड़ी चर्चाएं, क्या अंदरखाते कुछ चल रहा या दो बड़े नेताओं के अच्छे संबंधों का असर
कुछ नेता लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ने की बात कह रहे, कुछ बोले रहे- सरकार से जुड़े नेताओं के कारण एकतरफा होगी जीत

मनमोहन सिंह, जालंधर। जिमखाना क्लब को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार और सदस्य अपना दूसरा घर कहते हैं। उसके रख-रखाव के लिए मुखिया के साथ उनकी साथी भी चुने जाते हैं ताकि सेवाएं बेहतर हो सकें लेकिन इस बार नजारा कुछ अलग ही है।

अबतक दोनों ग्रुपों ने मेनीफेस्टों तक जारी नहीं किया, सिर्फ जुबानी वादों के कारण सदस्य बन चुनावों से किनारा करते नजर आ रहे हैं।
वहीं इस बार के चुनाव इतिहास के पन्नों को पलट नए पटकथा लिख रहे हैं, क्यों कि दो ग्रुपों का थिंक टैंक मैदान से गायब है और यह सबसे ज्यादा चर्चा विषय बन गया है।
क्या अंदर खाते कुछ चल रहा है क्योंकि दो बड़े दिग्गज जिनके आपसी संबंध किसी से छुपे नहीं हैं वह खुलकर सामने नहीं आए, क्या क्लब चुनाव में पीछे से राजनीति चल रही है, तो फिर पारदर्शी चुनाव संभव हो पाएंगे।
कुछ नेता लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ने की बात कह रहे, कुछ बोले रहे- सरकार से जुड़े नेताओं के कारण एकतरफा होगी जीत।
शुक्रवार को प्रोग्रेसिव ग्रुप और शनिवार को अचीवर्स ग्रुप की ओर से नामांकन दाखिल किए गए, लेकिन दोनों मौकों पर ग्रुपों के प्रमुख थिंक टैंक नजर नहीं आए। इसे लेकर क्लब सदस्यों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
चुनाव को लेकर जिस तरह परिस्थितियां बनीं और फिर बदलीं, उसने भी सदस्यों में गुफ्तगू बढ़ा दी है। क्लब के करीब 4683 सदस्यों में से लगभग 4078 सदस्य वोट डालने के पात्र हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस बार मतदान का प्रतिशत बढ़ता है या पिछले चुनावों की तरह करीब 60 से 70 प्रतिशत सदस्य ही मतदान करते रहे हैं।

ग्रुपों की सियासत से ऊबने लगे सदस्य ?
क्लब में सदस्यों के बीच हो रही चर्चाओं से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि कुछ सदस्य अब ग्रुपों की सियासत से अलग क्लब की बेहतरी और सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं। ऐसे में इस बार उम्मीदवारों के लिए केवल ग्रुप की ताकत के बजाय व्यक्तिगत संपर्क और सदस्यों के साथ रिश्ते भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्लब की बेहतरी और सदस्यों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के वादों के साथ दोनों ग्रुपों के मैनिफेस्टो भी चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। माना जा रहा है कि क्लब की बेहतरी से जुड़े मुद्दों को लेकर मैनिफेस्टो आज जारी किए जा सकते हैं।
रविवार को उम्मीदवार फोन कॉल्स और डोर-टू-डोर प्रचार में जुटे रहे। अब जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, चुनावी संपर्क और तेज होने की संभावना है। उम्मीदवारों की ओर से सदस्यों के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाया जा रहा है। जल्द ही पार्टियों के दौर भी शुरू होने की चर्चा है।
