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जालंधर की सियासत में भूचाल! मित्तल-भज्जी फैक्टर से बदलेंगे सत्ता के समीकरण… मेयर धीर-नितिन कोहली के क्या फैसला लेंगे!

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पंजाब हॉटमेल, जालंधर (मनमोहन सिंह)। शहर की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Ashok Mittal और Harbhajan Singh की एंट्री और सक्रियता ने जालंधर को पंजाब की सियासत का नया पावर हब बना दिया है।

पहली बार शहर से दो राज्यसभा सांसद मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जिसका असर वेस्ट, सेंट्रल, कैंट और नॉर्थ विधानसभा क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है।

मित्तल बने बीजेपी के नए ‘पावर सेंटर’

Ashok Mittal, जो पहले Aam Aadmi Party में ‘किंगमेकर’ माने जाते थे, अब Bharatiya Janata Party के सबसे मजबूत चेहरों में शामिल हो गए हैं। नगर निगम से लेकर उपचुनाव तक, उनके फैसलों ने कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय किया। अब उनके बीजेपी में आने से पार्टी को फंडिंग, उद्योगपतियों और शहरी वोट बैंक में जबरदस्त बढ़त मिलने की उम्मीद है।

फंडिंग से लेकर व्यापारियों तक मजबूत पकड़

मित्तल सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपतियों और कारोबारियों के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले नेता हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें कैंट सीट से मैदान में उतार सकती है। उनके जुड़ने से बीजेपी की छवि शहरी और मध्यम वर्ग में और मजबूत होगी, जबकि ‘आप’ को बड़ा आर्थिक और संगठनात्मक झटका लगा है।

ED छापों के बाद बदला सियासी खेल

सूत्रों के मुताबिक, Enforcement Directorate के छापों के बाद सियासी घटनाक्रम ने तेजी पकड़ी। छापों के कुछ ही दिनों बाद मित्तल का बीजेपी में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है और यह बदलाव राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

करीबी चेहरे भी रडार पर

मित्तल के करीबी—मेयर वनीत धीर और कारोबारी नितिन कोहली—अब बीजेपी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सेंट्रल और वेस्ट हलकों में बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले चुनाव और भी दिलचस्प हो सकते हैं।

भज्जी फैक्टर: युवाओं और सिख वोट बैंक पर नजर

Harbhajan Singh को Punjab Cricket Association में बड़ी भूमिका न मिलने से नाराजगी की चर्चाएं हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि Board of Control for Cricket in India में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। भज्जी का साथ बीजेपी को ‘सिख फेस’ और युवाओं में जबरदस्त क्रेज दिला सकता है।

‘आप’ में असंतोष, कार्यकर्ताओं में रोष

2022 की बड़ी जीत के बाद Aam Aadmi Party द्वारा पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और बाहरी चेहरों को प्राथमिकता देना अब भारी पड़ता दिख रहा है। जब यही ‘खास’ चेहरे पार्टी छोड़ रहे हैं, तो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

निष्कर्ष: जालंधर बनेगा सियासी रणभूमि

कुल मिलाकर, जालंधर की राजनीति अब नए मोड़ पर खड़ी है। मित्तल और भज्जी का प्रभाव आने वाले समय में बड़े चुनावी समीकरण बदल सकता है। सभी पार्टियों की नजर अब इस बदलाव पर टिकी हुई है।

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