Punjab में शराब ठेकेदारों पर बड़ा एक्शन: पहली बार डिफॉल्टरों की प्रॉपर्टी होगी नीलाम… इस मंथ लगेगी बोली!
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Punjab Hotmail, Chandigarh। पंजाब सरकार ने शराब लाइसेंस फीस का बकाया नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टर ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। आबकारी विभाग ने पहली बार 35 संपत्तियों को नीलामी के लिए चिन्हित किया है, जिनकी कुल कीमत करीब 33.58 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पंजाब सरकार ने शराब लाइसेंस फीस का बकाया नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टर शराब ठेकेदारों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पहली बार आबकारी विभाग ने ऐसे ठेकेदारों की संपत्तियां जब्त कर उनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है।
सरकार ने अब तक 35 संपत्तियों को नीलामी के लिए चिन्हित किया है, जिनकी कुल कीमत करीब 33.58 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन संपत्तियों की नीलामी मई के अंत और जून महीने में की जाएगी।
कई जिलों में फैला मामला, कृषि जमीन से लेकर कमर्शियल प्रॉपर्टी तक शामिल
यह कार्रवाई केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि Faridkot, Fazilka, Mansa, Amritsar, Tarn Taran और Bathinda समेत कई जिलों में फैला हुआ है। चिन्हित संपत्तियों में कृषि भूमि, हिस्सेदारी वाली जमीनें और कमर्शियल प्रॉपर्टियां शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में कई प्रभावशाली शराब कारोबारियों और राजनीतिक नेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन लोगों ने जानबूझकर सरकार का पैसा दबाया और किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चलता रहा। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार एक वरिष्ठ रिटायर्ड जज की नियुक्ति पर भी विचार कर रही है।
किन-किन संपत्तियों की होगी नीलामी
- जैतों रमियाना, Faridkot — 5 एकड़ कृषि भूमि, कीमत करीब 70 लाख रुपये
- बल्लुआना, तहसील अबोहर, Fazilka — 118 कनाल जमीन, कीमत 1.65 करोड़ रुपये
- खुब्बन क्षेत्र, फाजिल्का — 4 कनाल जमीन, कीमत 14 लाख रुपये
- मिपुर खुर्द, Mansa — दो संपत्तियां, कुल कीमत करीब 2.73 करोड़ रुपये
- गांव मनहियाला जय सिंह, Tarn Taran — कीमत 33 लाख रुपये
- हरप्रीत सिंह और अन्य मामलों में संपत्तियां — 9 लाख से 88 लाख रुपये तक
- गांव नवां नाग, Amritsar — संपत्ति कीमत 2.45 करोड़ रुपये
- बठिंडा में कमर्शियल प्रॉपर्टी — कीमत 56 लाख रुपये
“पिछली सरकारों ने शराब माफिया को बचाया” — हरपाल चीमा
Harpal Singh Cheema ने कहा कि अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारें आबकारी राजस्व बढ़ाने में विफल रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान शराब कारोबारियों के खिलाफ कभी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण कई लोग सरकार का करोड़ों रुपये का बकाया दबाकर बैठे रहे।
चीमा के अनुसार, कांग्रेस शासन के दौरान 2002 से 2007 तक शराब राजस्व 1462 करोड़ रुपये से घटकर 1363 करोड़ रुपये रह गया था। वहीं अकाली-भाजपा सरकार के दौरान 2015-16 के मुकाबले 2016-17 में करीब 400 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया।
उन्होंने कहा कि अब पंजाब सरकार डिफॉल्टरों की पहचान कर उनकी संपत्तियां सील कर रही है और कानून के तहत नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित की जा सके।
