Politics: पहले बंगाल गया अब हाथ से फिसली पार्टी की कमान, 28 साल पुराना TMC का नाम-चिह्न फिलहाल फ्रीज; ममता गुट ने EC को भेजे नए विकल्प!
राहुल गांधी बोले- वोट के बाद अब पार्टी चोरी! पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश; दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न देने के निर्देश, अंतिम फैसला अभी बाकी
पंजाब हॉटमेल ब्यूरो, नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है।

आयोग ने ममता बनर्जी और दूसरे गुट को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने गुरुवार रात 11:36 बजे ईमेल के जरिए आयोग को अपने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भेजे।

पार्टी ने यह जवाब कड़े विरोध के साथ दिया है। यह व्यवस्था फिलहाल 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए लागू होगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के नाम और चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है और मामला चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत तय किया जाएगा।
राहुल गांधी ने कहा- ‘अब पार्टी चोरी’
आयोग के अंतरिम आदेश पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना और एनसीपी के मामलों में ऐसा हुआ और अब तृणमूल कांग्रेस को लेकर भी यही तरीका अपनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने इसे ‘पार्टी चोरी’ बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर आयोग और संबंधित पक्षों के रुख अलग हो सकते हैं।
क्या 28 साल बाद बदलेगा TMC का चुनाव चिह्न?
‘फूल और घास’ वाला चिह्न 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद से पार्टी की चुनावी पहचान रहा है। मौजूदा आदेश स्थायी बदलाव नहीं है। दोनों गुटों को फिलहाल उपचुनाव के लिए अलग पहचान देने की व्यवस्था की गई है, जबकि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।
