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लड्डू से लीडरशिप तक: दुकान से राज्यसभा उपनेता तक, मित्तल परिवार का सफर; पहली बार विवादों में नाम!

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विवादों से हमेशा किनारा रहता है मित्तल परिवार का, पहली बार राजनीति में आए और अब निशाने पर!

प्रोग्राम में एक साथ आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, सीएम पंजाब भगवंत मान और राज्यसभा सांसद-एलपीयू चांसलर अशोक मित्तल।

मनमोहन सिंह

पंजाब हॉटमेल, जालंधर। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता Ashok Mittal के ठिकानों पर ED की छापेमारी के बाद सियासत गर्म है। पहली बार ऐसा हुआ है जब Lovely Professional University (LPU) से जुड़े मित्तल परिवार का नाम किसी बड़े विवाद में उछला है।

अब चर्चा सिर्फ छापेमारी की नहीं, बल्कि उस परिवार के सफर की भी है जिसने 10×10 की मिठाई की दुकान से शुरुआत कर शिक्षा, ऑटोमोबाइल और राजनीति तक अपनी पहचान बनाई।


🏬 1961: “लवली स्वीट्स” से शुरुआत

साल 1961 में राजस्थान से पंजाब आए स्वर्गीय Baldev Raj Mittal ने जालंधर छावनी में 10×10 फीट की छोटी सी दुकान “लवली स्वीट्स” शुरू की। सैन्य ठेकों के कारण बार-बार स्थानांतरण से परेशान होकर उन्होंने स्थायी कारोबार की नींव रखी।

बड़े बेटे रमेश मित्तल ने 11वीं में पढ़ाई छोड़ पिता का हाथ बंटाया। पारंपरिक मिठाइयों में नवाचार—खासकर छोटी बूंदी से बने मोतीचूर के लड्डू—ने “लवली” को ब्रांड बना दिया। 1986 तक यह जालंधर की अग्रणी मिठाई दुकानों में शुमार हो गई।


🚗 1991: “लवली ऑटोज़” और तानों से ताकत

मिठाई से आगे बढ़ते हुए परिवार ने 1991 में “लवली ऑटोज़” शुरू की। शुरुआत में ताने मिले—“लड्डू वाले अब गाड़ियां बेचेंगे।” लेकिन समय के साथ बजाज ऑटो और 1996 में मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से साझेदारी ने कारोबार को नई ऊंचाई दी।


🎓 2005-06: LPU का उदय

1999 के बाद शिक्षा क्षेत्र में कदम रखते हुए परिवार ने निजी विश्वविद्यालय का सपना देखा। 2005-06 में LPU की स्थापना हुई और यही टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।


आज 600 एकड़ में फैला यह कैंपस 50+ देशों के 40,000 से अधिक छात्रों, 3000+ फैकल्टी और 200+ प्रोग्राम्स के साथ देश के बड़े निजी विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। इंटेल, गूगल, SAP और सिस्को जैसी कंपनियों के साथ लैब्स, ओलंपिक स्तर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी पहचान हैं।


🏛️ कारोबार से राजनीति तक

कानून की पढ़ाई करने वाले अशोक मित्तल 1980 के दशक में पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े और बाद में LPU के चांसलर बने। 2022 में उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा। धीरे-धीरे वे पार्टी नेतृत्व के करीबी माने जाने लगे।


हाल ही में उन्हें राज्यसभा में Raghav Chadha की जगह उपनेता बनाया गया, जिससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ा।

सितंबर 2024 में Arvind Kejriwal के इस्तीफे के बाद, उन्होंने लुटियंस दिल्ली स्थित अशोक मित्तल के आवास को निवास के लिए चुना। यह कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना।


👨‍👩‍👦 तीसरी पीढ़ी का विस्तार

आज परिवार की तीसरी पीढ़ी ऑटोमोबाइल, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, ई-कॉमर्स, मिठाई-बेकिंग और स्टार्टअप्स के जरिए कारोबार को डिजिटल और ग्लोबल दिशा दे रही है। रियल एस्टेट और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।


🔎 पहली बार विवादों में

मित्तल परिवार का नाम अब तक सीधे राजनीतिक विवादों से दूर रहा। लेकिन हालिया ED कार्रवाई ने इस छवि को चुनौती दी है।

अब नजरें इस पर हैं कि यह विवाद उनके राजनीतिक और कारोबारी भविष्य को किस तरह प्रभावित करता है। राघव चड्ढा का नाम भी पूरे प्रकरण में सुर्खियां बटोर रहा है।


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