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CM ऑफिस तक शिकायतें: फिर भी जालंधर में अवैध निर्माण की नई कहानी, HEAT 7 गिरा उसी जगह BANSAL SWEETS बना रहा है अवैध बिल्डिंग; किसकी मिलीभगत…?

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20 साल से चले आ रहे कब्ज़े और भ्रष्टाचार का खुला खेल, नगर निगम की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

पंजाब हॉटमेल, जालंधर। शहर की अवैध निर्माण नीति पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जालंधर के बीचों-बीच स्थित HEAT 7 बिल्डिंग को जब नगर निगम ने अवैध करार देकर गिरा दिया, तो लोगों ने राहत की सांस ली। मगर अब उसी स्थान पर एक और नया अवैध निर्माण—BANSAL SWEET SHOP—बन रहा है, जो पहले से भी ज़्यादा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खड़ा किया जा रहा है।

HEAT 7: दो दशक से चला आ रहा था नाजायज कब्जाHEAT 7 बिल्डिंग करीब 20 वर्षों से बिना अनुमति के सड़क पर कब्जा जमाए हुए थी। नगर निगम के रिकॉर्ड में भी यह बिल्डिंग नाजायज घोषित हो चुकी थी। इसमें सड़क की तरफ जबरन रास्ता बनाकर कानून का खुला उल्लंघन किया गया था।

कई बार इसकी शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई बहुत देर से हुई।नगर निगम ने आखिरकार इसे अवैध मानते हुए गिरा तो दिया, लेकिन अब उसकी जगह फिर से वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है—इस बार एक बड़े नाम वाले स्वीट शॉप ब्रांड “BANSAL SWEETS” के नाम से।

BANSAL SWEETS भी HEAT 7 के रास्ते पर

जिस प्लॉट पर कभी HEAT 7 खड़ा था, अब वहां BANSAL SWEET SHOP का निर्माण कार्य जोरों पर है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह निर्माण भी बिना नक्शा पास करवाए, बिना NOC और मंजूरी के हो रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस प्रकार HEAT 7 ने सड़क की तरफ अवैध गेट और रास्ता बनाकर कानून का उल्लंघन किया था, अब BANSAL SWEETS भी ठीक वही कर रहा है। यह मुख्य सड़क की तरफ मेन गेट बनाकर सार्वजनिक जगह का अतिक्रमण कर रहा है।

शिकायतें पहुंची सीएम तक, पर प्रशासन मौन

स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अवैध निर्माण की शिकायत नगर निगम जालंधर, नगर आयुक्त, स्थानीय विधायक, यहां तक कि पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेज दी है।

परन्तु हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद न तो कोई निरीक्षण हुआ, न ही निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई। आरोप है कि भ्रष्टाचार और रिश्वत के दम पर यह निर्माण तेज़ी से जारी है।

रिश्वत और रसूख का खेल: कानून को किया जा रहा दरकिनार

सूत्रों के अनुसार, यह बिल्डिंग करोड़ों में बेची गई है और अब इसके निर्माण में भी लाखों की रिश्वत दी जा रही है ताकि नियमों को ‘मैनेज’ किया जा सके।

बिल्डिंग बाइलॉज़ के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक भवन का मेन गेट सीधे सड़क की तरफ नहीं हो सकता, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर बांसल स्वीट्स ने मुख्य सड़क की ओर गेट बना दिया है।

जनता में रोष, प्रशासन पर भरोसा डगमगाया

स्थानीय लोगों में नाराज़गी का माहौल है। उनका कहना है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो नगर निगम सिर्फ आम लोगों के लिए नियम लागू करता रहेगा और प्रभावशाली लोगों को खुली छूट मिलती रहेगी।लोगों ने मांग की है कि इस निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की जाए।

क्या बोले विशेषज्ञ और कानून जानकार?

शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह से बार-बार अवैध निर्माण को नज़रअंदाज़ किया गया, तो इससे पूरे शहर की ज़मीन और ट्रैफिक प्लानिंग प्रभावित होगी।

ऐसे मामलों में सिर्फ बिल्डिंग गिराना काफी नहीं, बल्कि दोषी बिल्डर, अधिकारी और राजनैतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

निष्कर्ष…: HEAT 7 गिरा, पर उसका ‘सिस्टम’ अभी जिंदा है। जालंधर में अगर कानून का राज स्थापित करना है, तो बांसल स्वीट्स के इस अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन आँखें खोलता है या फिर भ्रष्ट तंत्र के सामने फिर से झुक जाता है।

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