जालंधर में कथित अवैध निर्माण पर बड़ा सवाल: ‘रातों-रात’ तैयार हुआ किंग सेनेट्री की दुकान, नगर निगम की मिलीभगत के खेल में हुई गेम; सरकार को लाखों का चूना!
सैनिट्री मार्केट की गली में दो मंजिला व्यावसायिक इमारत को लेकर विवाद, RTI एक्टिविस्ट ने निगम व विजिलेंस से की शिकायत; एटीपी पर उठे सवाल?
Punjab Hotmail, जालंधर। शहर के व्यस्ततम शहीद भगत सिंह चौक के निकट सैनिट्री मार्केट की गली में स्थित मोहल्ला बक्रम बक्श में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक निर्माण किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ‘किंग सेनेट्री’ के नाम से एक नया शोरूम रातों-रात तैयार कर दिया गया, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
रातों-रात तैयार हुआ शोरूम, लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले पुराने मकानों को तोड़ा गया और उनके स्थान पर कम समय में दो मंजिला व्यावसायिक इमारत तैयार कर दी गई। आरोप है कि निर्माण पूरा होते ही शटरों पर पेंट कर अंदर तुरंत सामान रख दिया गया, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि इमारत पहले से संचालित थी।
बिना अनुमति निर्माण और कनेक्शन लेने के आरोप

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भवन का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे और आवश्यक अनुमति के किया गया। साथ ही सड़क तोड़कर कथित रूप से सीवरेज और पानी का कनेक्शन लेने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
RTI एक्टिविस्ट ने निगम और विजिलेंस से की शिकायत

मामले को लेकर एक RTI एक्टिविस्ट रवि छावड़ा ने नगर निगम और विजिलेंस विभाग को शिकायत देकर पूरे निर्माण की जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि निर्माण बिना मंजूरी के हुआ है तो इससे नगर निगम को राजस्व का नुकसान हुआ हो सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो नगर निगम को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
जांच में आरोप सही पाए गए तो हो सकती है ये कार्रवाई
यदि जांच में निर्माण अवैध या बिना स्वीकृत नक्शे के पाया जाता है, तो पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 के तहत नगर निगम निम्न कार्रवाई कर सकता है—
✅ स्टॉप वर्क और कारण बताओ नोटिस जारी करना।
✅ अवैध निर्माण या उसके हिस्से को सील करना।✅ अवैध हिस्से को हटाने या ध्वस्तीकरण (बुलडोजर) की कार्रवाई।
✅ ध्वस्तीकरण का खर्च भवन मालिक से वसूलना।
✅ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर विभागीय कार्रवाई।
अब सबकी नजर निगम की कार्रवाई पर

फिलहाल पूरे मामले में नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है या नहीं। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एटीपी विकास दुआ से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि कंप्लेंट पर ही कारवाई करते हैं। कंप्लेंट हुई और नंबर भी लग गया पर कार्रवाई जीरो! इससे साफ है कि नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से अवैध निर्माण करवाए जा रहे हैं।
