राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम: चंपत राय के समर्थन में खड़े रहे ज्यादातर ट्रस्टी, फिर भी संविधान के चलते इस्तीफा मंजूर; गोपाल राव पर गिरी गाज
अयोध्या में हुई अहम बैठक, महासचिव बदले, मंदिर प्रशासन में बड़े बदलाव की तैयारी!
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Punjab Hotmail, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे अहम फैसला ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर रहा।

बैठक में मौजूद अधिकांश ट्रस्ट सदस्यों ने साफ कहा कि वे चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ट्रस्ट के संविधान में मौजूद प्रावधानों के कारण इस्तीफा स्वतः प्रभावी माना गया और उसे मंजूर करना पड़ा। बैठक के दौरान ट्रस्ट के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए और कई अहम पदों पर बदलाव का रास्ता साफ हो गया।

बैठक से पहले ही बढ़ा तनाव, गोपाल राव को देख भड़के कोषाध्यक्ष
बैठक शुरू होने से पहले ही राम मंदिर परिसर का माहौल गरमा गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि जब बैठक स्थल पहुंचे तो उनकी नजर आमंत्रित सदस्य गोपाल राव पर पड़ी।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए गोपाल राव से वहां से हटने को कहा। बताया गया कि इसके बाद गोपाल राव बैठक स्थल से हटकर परिसर के कंट्रोल रूम के पास चले गए और बैठक से दूर रहे।
संविधान के एक प्रावधान ने बदल दिया पूरा फैसला
बैठक में जब चंपत राय के इस्तीफे पर चर्चा शुरू हुई तो अधिकांश ट्रस्टियों ने कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, वरिष्ठ विधिवेत्ता और ट्रस्ट सदस्य के. परासरन ने ऑनलाइन जुड़कर ट्रस्ट के संविधान का संबंधित प्रावधान पढ़कर सुनाया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार महासचिव का इस्तीफा देते ही स्वतः प्रभावी हो जाता है और उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प ट्रस्ट के पास नहीं है।
इसके बाद अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित सभी सदस्यों ने संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर उठे सवाल
बैठक में ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे। गणना कक्ष की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण कई सदस्यों ने इसे उनकी लापरवाही माना। वहीं आमंत्रित सदस्य गोपाल राव पर भी मंदिर की व्यवस्थाओं और परंपराओं को लेकर सवाल खड़े किए गए।
ट्रस्ट के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मंदिर की पारंपरिक पूजा व्यवस्था में बदलाव किया और अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया।
गोपाल राव को सभी जिम्मेदारियों से हटाया गया
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने बैठक में गोपाल राव को ट्रस्ट से हटाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यदि अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी तय की जा रही है तो गोपाल राव की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस प्रस्ताव पर अधिकांश ट्रस्ट सदस्य सहमत हुए और गोपाल राव को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।
कृष्ण मोहन होंगे नए महासचिव, CEO नियुक्त करने की तैयारी
बैठक में मंदिर प्रशासन को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कृष्ण मोहन को नया महासचिव बनाए जाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही ट्रस्ट ने पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करने का फैसला लिया।
इसके लिए एक समिति बनाई जाएगी, जो चयन प्रक्रिया और मानकों का मसौदा तैयार करेगी।
दानदाताओं की शिकायतों पर भी हुई चर्चा
बैठक में मंदिर को दान देने वाले श्रद्धालुओं की शिकायतों पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट ने माना कि दान में मिली वस्तुओं और उनके रिकॉर्ड को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बैठक में लगभग 2800 दान की गई वस्तुओं का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया। ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि भविष्य में इस जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
चंपत राय को बताया ईमानदार, नई व्यवस्था पर फोकस
बैठक के दौरान ट्रस्ट के अधिकांश सदस्यों ने चंपत राय की ईमानदारी और लंबे समय से किए गए कार्यों की सराहना की। वहीं भविष्य में मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।
यह बैठक राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि इसमें प्रशासनिक ढांचे में कई बड़े बदलावों का रास्ता साफ हुआ।
