जालंधर में मेयर का बड़ा एक्शन: विज्ञापन माफिया पर लगेगी लगाम, यूनिपोल का सिंगल टेंडर BOT बेस पर—नगर निगम को मिलेगा करोड़ों का फायदा… पढ़ें
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पंजाब हॉटमेल, जालंधर (मनमोहन सिंह)। नगर निगम जालंधर ने शहर में लंबे समय से सक्रिय विज्ञापन माफिया और यूनिपोल पर ‘एकाधिकार’ जमाए बैठे नैक्सेस को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

मेयर वनीत धीर ने पूरे शहर में यूनिपोल पर विज्ञापन के लिए सिंगल टेंडर BOT (Build-Operate-Transfer) बेसिस पर नया टेंडर जारी किया है।
निगम की यह रणनीति न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि आने वाले वर्षों में करोड़ों रुपए की आमदनी भी सुनिश्चित करेगी। कई सालों से जालंधर में यूनीपोल विज्ञापनों की कमाई में भारी धांधली चल रही थी।

नगर निगम के अनुसार शहर के ज्यादातर यूनिपोल पर एक ही कंपनी का कब्ज़ा था और ठेका जारी ना होने से निगम को कई वर्षों तक भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन अब नगर निगम ने DBOMT (Design-Built-Operate-Maintain-Transfer) आधार पर टेंडर जारी करके इस अव्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल की है।

टेंडर के लिए टेक्निकल और फाइनैंशियल बिड ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 18 दिसंबर तक भरी जा सकेंगी। स्थानीय निकाय विभाग ने यह ठेका 7 वर्ष के लिए निर्धारित किया है, जिससे नगर निगम को स्थिर और भारी राजस्व मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार यह कदम शहर की आउटडोर एडवरटाइजिंग व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा।
मेयर का यह फैसला शहर में वर्षों से चल रही अनियमितताओं पर रोक लगाते हुए एक मजबूत प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

जालंधर मेयर वनीत धीर ने बताया कि 20×10 के शहर में 59 यूनिपोल है जिन्हें 1472 रुपए विज्ञापन लगाने की समय सीमा 7 साल तय की गई है जबकि 2 साल के लिए बढ़ाई जा सकती है। यानि की 9 साल के लिए नगर निगम ने यूनिपोल और क्योस्क पोल्स 30×40 (दोनों तरफ) के लिए बुकिंग शुरू कर दिए। शहर में 1680 क्योस्क पोल्स लगे हुए हैं। मेयर धीर ने कहा कि सरकार को विज्ञापन बुकिंग से डेढ़ सौ करोड़ रुपए राजस्व का फायदा होगा जो सिद्धू के कारण हुआ था।
