सरकार की कार्रवाई की चेतावनी पर कर्मचारी संगठनों का पलटवार, बोले- 29 अगस्त को CM को देंगे जवाब
महाबंद में गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियों पर भड़के मुलाजिम नेता; कहा- “सूचियां जितनी मर्जी बनती रहें, कोई परवाह नहीं”
Punjab Hotmail, जालंधर। पंजाब में महाबंद के दौरान ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सरकार की ओर से गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियां तैयार करने और सेवा नियमों के तहत कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने के बाद कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सीपीएफ कर्मचारी यूनियन के सूबा प्रधान सुखजीत सिंह ने दो टूक कहा कि सरकार जितनी मर्जी सूचियां तैयार करवा ले, कर्मचारी जत्थेबंदियां ऐसे पत्रों से डरने वाली नहीं हैं।
उन्होंने ऐलान किया कि 29 अगस्त को होने वाली सूबे की बैठक में मुख्यमंत्री के सामने सरकार के इस कदम का जवाब दिया जाएगा।

“मांगों पर बातचीत के बजाय गैरहाजिरी की सूचियां बना रही सरकार”
सुखजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों पर बातचीत करने के बजाय अब गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियां तैयार करवाकर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल 17 से 26 अगस्त तक पहले से निर्धारित थी, जबकि 27 अगस्त को महाबंद का कार्यक्रम रखा गया था।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की लंबित डीए, पुरानी पेंशन स्कीम समेत कई अहम मांगें लंबे समय से सरकार के समक्ष रखी जा रही हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कार्रवाई की धमकी से उनका संघर्ष कमजोर नहीं होगा और वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं।
सरकार के पत्र में क्या दिए गए निर्देश?
सरकार की ओर से जारी पत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि महाबंद के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाए। साथ ही संबंधित सेवा नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने की बात भी कही गई है।
सरकार के इस कदम को कर्मचारी संगठन आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है तो संगठन उसका विरोध करेंगे।
CM की बैठक में शामिल न होने पर भी उठाए सवाल
सुखजीत सिंह ने मुख्यमंत्री की कर्मचारियों के साथ प्रस्तावित बैठक को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से बातचीत करने के बजाय सरकार टकराव का रास्ता अपना रही है।
उन्होंने कहा कि 29 अगस्त की सूबे की बैठक में कर्मचारी संगठन अपनी मांगों और सरकार की ओर से जारी कार्रवाई संबंधी पत्र पर विस्तार से चर्चा करेंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों को कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय बातचीत के जरिए लंबित मांगों का समाधान किया जाए।
कर्मचारी नेता की दो टूक
सुखजीत सिंह ने कहा, “सूचियां जितनी मर्जी बनती रहें, हमें कोई परवाह नहीं है। ऐसे पत्रों का मुलाजिम जत्थेबंदियों पर कोई असर नहीं है। 29 अगस्त को होने वाली सूबे की बैठक में मुख्यमंत्री को इसका जवाब दिया जाएगा।”
अब सबकी नजर 29 अगस्त की बैठक पर है, जहां कर्मचारी संगठन सरकार के कार्रवाई संबंधी कदम और अपनी लंबित मांगों को लेकर अपना पक्ष रखेंगे।
