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राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में बड़ा खुलासा! SIT जांच पूरी, ट्रस्ट के कई पदाधिकारी रडार पर, PMO तक पहुंची रिपोर्ट

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Punjab Hotmail, लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले में केवल गणनाकर्मी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।

30 से ज्यादा लोगों की भूमिका संदिग्ध

एसआईटी की जांच में करीब 30 लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पूछताछ के दौरान कई लोगों द्वारा संतोषजनक जवाब न दिए जाने और तथ्यों को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प सहित कई लोगों से 20 घंटे से अधिक पूछताछ की जा चुकी है।

FIR की तैयारी, बड़े नाम आ सकते हैं सामने

सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द एफआईआर दर्ज की जा सकती है। टिन्नू यादव समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि विवेचना के दौरान कई बड़े नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

PMO तक पहुंची गोपनीय रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी लगातार नजर बनाए हुए है। सूत्रों का दावा है कि पीएमओ के अधिकारियों ने भी मंदिर पहुंचकर स्वतंत्र स्तर पर जानकारी जुटाई और एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजी है।

रिपोर्ट में कथित हेरफेर, प्रशासनिक लापरवाही और कुछ पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख होने की चर्चा है।

टिन्नू यादव पर सबसे ज्यादा सवाल

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। वह पहले ड्राइवर रह चुका है और बाद में मंदिर से जुड़े कई कार्यों में उसका प्रभाव बढ़ा। प्रस्तावित एफआईआर में उसे प्रमुख आरोपी बनाया जा सकता है।

40 गणनाकर्मी हटाए गए

चढ़ावा गणना प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए करीब 40 गणनाकर्मियों को हटा दिया गया है। उनकी जगह नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।

मंदिर परिसर में निगरानी व्यवस्था भी सख्त कर दी गई है। एसआईटी ने संबंधित अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों को फिलहाल अयोध्या न छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

अब शासन के फैसले का इंतजार

करीब 150 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, ट्रस्ट की जवाबदेही तय करने और संभावित पुनर्गठन को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

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