जालंधर के Sarvodya Hospital केस में कोर्ट सख्त! डॉ. कपिल गुप्ता की पासपोर्ट याचिका पर SIT और SHO से मांगी जवाबदेही!
#Jalandhar #SarvodyaHospital #DrKapilGupta #CourtNews #PunjabNews #BreakingNews #SIT #PunjabPolice #LegalNews #PassportRenewal #JalandharNews #HighProfileCase #CrimeNews #PunjabUpdate #CourtHearing
Punjab Hotmail, जालंधर । Jalandhar के चर्चित Sarvodya Hospital मामले में माननीय अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी Dr. Kapil Gupta की पासपोर्ट रिन्यूअल याचिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना पूरी जांच रिपोर्ट और SIT की स्थिति स्पष्ट हुए किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने मांगी लिखित रिपोर्ट, SHO और SIT पर बढ़ा दबाव
माननीय अदालत ने थाना नवी बारादरी के SHO को आदेश दिया है कि वह यह स्पष्ट करें कि क्या डॉ. कपिल गुप्ता जांच में शामिल हुए हैं या नहीं। साथ ही अदालत ने यह भी पूछा है कि गठित SIT को आरोपी के पासपोर्ट रिन्यूअल पर कोई आपत्ति है या नहीं।
कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 27 मई तक रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो SHO और SIT अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया जा सकता है।
Non-Bailable FIR में आरोपी, फिर कैसे जारी हुई NOR?
मामले में बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब Dr. Kapil Gupta, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. अनवर इब्राहिम खान और CA संदीप कुमार सिंह जैसे आरोपी Non-Bailable अपराधों में नामजद हैं, तो थाना स्तर से No Objection Report (NOR) कैसे जारी कर दी गई?
अदालत ने इस पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि जब जांच SIT के पास है तो थाना नवी बारादरी ने किस आधार पर NOR जारी की। कोर्ट को यह भी बताया गया कि मुख्य फाइल में पुलिस की NOR पहले से लगी हुई है।
“पुलिस जांच में शामिल ही नहीं कर रही” — बचाव पक्ष
डॉ. कपिल गुप्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस खुद ही आरोपी को जांच में शामिल नहीं कर रही।
उन्होंने कहा कि अभी तक यह तय नहीं किया गया कि उन्हें जांच में शामिल किया जाना है या नहीं। वकील ने यह भी कहा कि इस संबंध में वह शपथ पत्र देने को तैयार हैं।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट कहा कि SIT की लिखित रिपोर्ट के बिना केवल मौखिक दलीलों के आधार पर NOR जारी करने के अनुरोध पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट बोली — विदेश यात्रा अधिकार है, लेकिन जांच में सहयोग भी जरूरी
अदालत ने कहा कि वह आरोपी के विदेश यात्रा करने के अधिकार को समझती है, लेकिन किसी लंबित FIR में जांच में सहयोग करना भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने SHO नवी बारादरी को Special Messenger नियुक्त करते हुए आदेश दिया कि SIT से लिखित रिपोर्ट लेकर अदालत में पेश की जाए।
यदि SIT को आरोपी की जांच में जरूरत नहीं है तो यह भी लिखित रूप में बताया जाए, और अगर जानबूझकर जांच में शामिल नहीं किया जा रहा तो उसका कारण भी रिकॉर्ड पर लाया जाए।
27 मई की सुनवाई पर टिकी सबकी नजरें
माननीय अदालत ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई 27 मई 2026 को होगी और यदि तब तक रिपोर्ट पेश नहीं हुई तो SHO और SIT अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा।
यह मामला FIR नंबर 233/23.12.25 थाना नवी बारादरी में दर्ज हुआ था और अब इस पूरे केस पर अदालत की सख्ती के बाद सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
