जालंधर किडनी कांड में नया मोड़: 1 मई की सुनवाई से पहले ‘रेगुलर बेल’ पर बड़ा विवाद… इस ‘AAP’ नेता का हाथ!
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पंजाब हॉटमेल, जालंधर। बहुचर्चित किडनी कांड में एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। मामले की अगली सुनवाई 1 मई को तय है, जिसमें कई अहम तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

‘रेगुलर बेल’ पर सवाल, कोर्ट को गुमराह करने के आरोप
मामले में आरोपी डॉक्टर डॉ. राजेश अग्रवाल की जमानत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में पेशी के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा यह बताया गया कि आरोपी को 10 अगस्त 2016 को ट्रायल कोर्ट से ‘रेगुलर बेल’ मिल चुकी है।

हालांकि, बाद में ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड और आदेशों में यह स्पष्ट हुआ कि उस तारीख को किसी भी प्रकार की नियमित जमानत नहीं दी गई थी।
2015 किडनी रैकेट: कई डॉक्टरों पर गंभीर आरोप
साल 2015 में सामने आए इस किडनी कांड में कई डॉक्टरों और प्रबंधकों पर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया कि बिना अनुमति मरीजों की किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की गई।
अहम गवाह की गवाही अब तक अधूरी
मामले में एक अहम गवाह—सरकारी अधिकारी द्वारा लिखित बयान देने के बावजूद—करीब 11 साल में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। अब पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने अदालत से गवाही फिर से शुरू करवाने (विटनेस विंडो) की मांग की है।
हाईकोर्ट ने पहले ही जमानत कर दी थी खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 अगस्त 2016 को आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट के अनुसार, इसके बाद पहले के सभी अंतरिम आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे।
1 मई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजर 1 मई को होने वाली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकता है कि ‘रेगुलर बेल’ का दावा कितना सही है और क्या कोर्ट को गुमराह किया गया था।
