जहां स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से शुरू होती है सच्ची मानवता: आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
भागवत कथा के पंचम दिवस पूतना चरित्र व माखन चोरी लीला का रसपूर्ण वर्णन, श्री गिरिराज पूजन एवं छप्पन भोग महोत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
पंजाब हॉटमेल ब्यूरो, जालंधर। साई दास स्कूल ग्राउंड, पटेल चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस परम श्रद्धेय आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और मानव जीवन में परमार्थ एवं सेवा के महत्व से परिचित करवाया।

कथा के दौरान श्री पूतना चरित्र तथा माखन चोरी लीला का अत्यंत भावपूर्ण एवं रसपूर्ण वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने कहा कि मानव योनि में जन्म लेना मात्र मानवता का प्रमाण नहीं है।

जब तक मनुष्य के भीतर स्वार्थ की भावना विद्यमान रहती है, तब तक वह मानव होते हुए भी राक्षसी प्रवृत्तियों के समीप रहता है। लेकिन जब व्यक्ति स्वार्थ का त्याग कर परमार्थ की भावना से जीवन जीता है, तभी वह सच्ची मानवता की श्रेष्ठ श्रेणी में पहुंचता है।
परमार्थ, परोपकार और सेवा ही मनुष्य को महान बनाते हैं।

पूतना चरित्र से मिला अहंकार और दुराचार के अंत का संदेश
पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने बताया कि कंस ने अहंकारवश स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझ लिया था।

अपने विरोध में खड़े होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समाप्त करने की मानसिकता रखने वाले कंस ने ब्रज में जन्मे बालकों की हत्या का षड्यंत्र रचा और इसी उद्देश्य से पूतना को भेजा। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना को भी मोक्ष प्रदान किया।

आचार्य श्री ने कहा कि कंस प्रतापी राजा उग्रसेन का पुत्र होते हुए भी अपने स्वार्थ, अहंकार और दुराचरण के कारण राक्षसी प्रवृत्ति का अधिकारी बन गया। अंततः उसके अत्याचार और अधर्म का अंत स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने किया।

माखन चोरी लीला: वस्तुओं का उपयोग और मनुष्यों से प्रेम का संदेश
माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि गोकुल का दूध, दही और माखन कंस के अनुचरों को बलवान बनाकर अधर्म को बढ़ावा दे रहा था। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने माखन आदि ग्वाल-बालों को खिलाया, ताकि वे बलवान बनें और अधर्मी शक्तियों का सामना कर सकें।






भगवान श्रीकृष्ण का ग्वाल-बालों के प्रति प्रेम इतना अद्भुत था कि वे उनके साथ बैठकर भोजन करते और उनके जूठन को भी प्रेमपूर्वक स्वीकार करते थे।
इसी प्रसंग में आचार्य श्री ने कहा—“हम वस्तुओं से प्रेम करते हैं और मनुष्यों का उपयोग करते हैं, जबकि होना यह चाहिए कि हम वस्तुओं का उपयोग करें और मनुष्यों से प्रेम करें।”




उन्होंने कहा कि प्रेम की भाषा ऐसी है, जिसे बहरे भी सुन सकते हैं और गूंगे भी समझ सकते हैं। माखन चोरी लीला हमें प्रेम, समानता, अपनत्व और निःस्वार्थ भाव से जीवन जीने की यही प्रेरणा देती है।
श्री गिरिराज पूजन एवं छप्पन भोग महोत्सव ने बांधा भक्ति का समां
पंचम दिवस के अवसर पर श्री गिरिराज पूजन एवं छप्पन भोग महोत्सव का विशेष आयोजन अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया गया। भगवान श्री गिरिराज महाराज को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए गए।

इस दौरान कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ महोत्सव में भाग लिया।
कई गणमान्य व्यक्तियों ने की विशेष शिरकत
इस अवसर पर विशेष रूप से यशपाल चौधरी, अभिषेक चौधरी, सुनील नय्यर, उमेश औहरी, संदीप मलिक, चंदन वडेरा, ब्रिज मोहन चड्ढा, महेश मखीज, अंकुश जुनेजा, अश्वनी कुमार (आशू), संजय सहगल, हेमंत थापर, राजवंश मल्होत्रा, देवेंद्र अरोड़ा, हरीश कोहली, रिंकू मल्होत्रा, बलविंदर शर्मा, विजय शर्मा, सोनू चोपड़ा, सुमित गोयल, पंडित श्री कपिल देव शर्मा, संदीप कुमार, भूपेंद्र सिंह (बिल्ला), तरुण सरीन, जितेंद्र सोनू, राजेश बीगामल, तरसेम रिंकू, अरुण मल्होत्रा, राहुल शर्मा, राहुल बाहरी, देवेंद्र वर्मा और नरेंद्र वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा काउंसलर रोनी, विजय कुमार वर्मानी, विशाल भुटानी, जी.के. बाली (भारत विकास परिषद, आस्था शाखा), पर्विश कात्याल, शिव अरोड़ा, चेतन धीर (डिक्सन ग्रुप), नीरज अग्रवाल, लकी मल्होत्रा, श्वेता धीर, इंस्पेक्टर अनु पाल्याल और संजीव वासल ने भी कथा में विशेष रूप से उपस्थित होकर आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण करते हुए भक्ति, प्रेम, परमार्थ और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरा कथा स्थल राधे-राधे और श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंजता रहा।
