कॉलेजियम प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज ने उठाए सवाल: ‘कारण बताए बिना चयन, पारदर्शिता और योग्य जजों के साथ अन्याय’
पंजाब हॉटमेल, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

।उन्होंने कहा कि यदि कॉलेजियम किसी जज के चयन या पदोन्नति की सिफारिश करती है, तो उसके पीछे के कारण सार्वजनिक न करना न केवल पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है, बल्कि उन योग्य और उत्कृष्ट न्यायाधीशों के साथ भी अन्याय है, जिनका चयन नहीं हो पाता।

‘सिफारिशों के पीछे के कारण नहीं बताए जा रहे’
कानूनी थिंक टैंक ‘विधि’ की रिपोर्ट के विमोचन के दौरान आयोजित चर्चा में जस्टिस भुइयां ने कहा कि उन्होंने कॉलेजियम के हालिया तीन प्रस्तावों का अध्ययन किया, लेकिन उनमें किसी भी सिफारिश के पीछे का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पारदर्शिता के मूल सिद्धांत से पीछे हटने जैसा नहीं है?
अयोग्य लोगों को मिल सकता है मौका
जस्टिस भुइयां ने कहा कि नियुक्तियों और पदोन्नति के कारण सार्वजनिक न करने से न्यायपालिका में ऐसे लोगों के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है, जो पूरी तरह योग्य नहीं हैं।
उनका मानना है कि हाल की कुछ कॉलेजियम सिफारिशें भी एक तय ढर्रे पर चलती हुई दिखाई देती हैं।
खुलि चर्चा से बढ़ेगा जनता का विश्वास
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा बनाए रखने और असंवैधानिक सोच रखने वाले लोगों को व्यवस्था से दूर रखने के लिए ्कॉलेजियम की सिफारिशों पर खुली और पारदर्शी चर्चा आवश्यक है जे
। कारणों का खुलासा न करना उन कई योग्य न्यायाधीशों के साथ भी अन्याय है, जिन्होंने बेहतर कार्य किया है।
लाइव स्ट्रीमिंग को बताया सबसे बड़ा पारदर्शी कदम।
जस्टिस भुइयां ने अदालतों की कार्यवाही के लाइव प्रसारण का भी समर्थन किया। उन्होंने इसे पिछले एक दशक में न्यायपालिका की पारदर्शिता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि अदालतें जितनी अधिक जनता के लिए खुली होंगी, न्याय प्रणाली पर लोगों का विश्वास उतना ही मजबूत होगा।
