करतारपुर फ्लाईओवर पर दर्दनाक हादसा: दंपति समेत तीन की मौत, तीन मासूम बेटियां घायल; पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल!
Punjab Hotmail, जालंधर/करतारपुर। जालंधर-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिधीपुर (आईटीबीपी कैंप) फ्लाईओवर के पास रविवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं।

हादसे में सुरेंद्र शुक्ला (29), उनकी पत्नी प्रियंका तिवारी (27) और बाद में उपचार के दौरान उनकी 65 वर्षीय मां जमवंती की मौत हो गई। वहीं, दंपति की तीन बेटियां अंशिका (13), अर्पिता (8) और एक वर्षीय मानवी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है।

गलत दिशा से आई इनोवा से टक्कर का आरोप
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हादसा सुबह करीब 10 बजे उस समय हुआ, जब परिवार स्विफ्ट कार (PB10EP0569) में सवार होकर डेरा ब्यास जा रहा था। इसी दौरान अमृतसर से जालंधर की ओर आ रही एक इनोवा कार (PB08CH6366) से उसकी आमने-सामने की टक्कर हो गई।
परिजनों का आरोप है कि इनोवा कार गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से आ रही थी, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में पहुंचा, जिसके बाद हादसा हुआ। इस बिंदु को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है और जांच जारी है।

एसएसएफ ने पहुंचाए अस्पताल, तीन की गई जान
सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) को सुबह 9:11 बजे MDT के जरिए हादसे की सूचना मिली। टीम चार मिनट में मौके पर पहुंची और सभी घायलों को एंबुलेंस की मदद से न्यू ऑर्थो केयर अस्पताल, करतारपुर पहुंचाया।
इलाज के दौरान पहले प्रियंका तिवारी, फिर सुरेंद्र शुक्ला और देर शाम उनकी मां जमवंती ने दम तोड़ दिया। तीनों बच्चियां अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें दो की टांगों में गंभीर फ्रैक्चर बताया जा रहा है।
परिजनों का आरोप- देर रात तक नहीं दर्ज हुई शिकायत
मृतक सुरेंद्र शुक्ला की बहन माया शुक्ला ने आरोप लगाया कि हादसे के कई घंटे बाद तक पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। उनका कहना है कि पुलिस बार-बार हादसे की परिस्थितियों को अलग तरीके से लिखने का प्रयास कर रही थी।



परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें हादसे की वजह इनोवा के डिवाइडर पार करने को बताया गया था। परिवार का कहना है कि वे इससे सहमत नहीं थे, इसलिए उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
हाईवे किनारे खड़े रहे क्षतिग्रस्त वाहन
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सुबह हुए हादसे के बावजूद देर रात तक दोनों क्षतिग्रस्त वाहन हाईवे किनारे पड़े रहे। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा फोर्स ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने और ट्रैफिक बहाल करने का काम किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने वाहनों को पूरी तरह हटाने और घटनास्थल को सुरक्षित बनाने में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई।
पुलिस का पक्ष
जांच अधिकारी एएसआई पप्पू गिल ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की और वाहनों को सड़क से हटाकर किनारे कराया। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में इनोवा चालक की लापरवाही सामने आई है।
घायल चालक की पहचान मुकेश चोपड़ा, निवासी सेंट्रल टाउन, जालंधर के रूप में हुई है, जबकि वाहन जानकी, पत्नी इंद्रपाल चोपड़ा, के नाम पर पंजीकृत है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच के घेरे में कई सवालइस दर्दनाक हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि हादसा गलत दिशा से चल रहे वाहन के कारण हुआ, तो इसकी पुष्टि जांच में कैसे होगी? यदि वाहन डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में पहुंचा, तो उसके पीछे क्या कारण था?
वहीं, परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज करने में देरी और बयान बदलने के लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।
हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि सड़क सुरक्षा, दुर्घटना जांच और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि आखिर इस हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
