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LPG Crisis के बीच सख्त कदम: सरकार ने लागू किया आवश्यक वस्तु अधिनियम, तेल-गैस कंपनियों को रियल-टाइम डेटा साझा करने का आदेश… ऐसे रुकेगी कालाबाजारी!

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पंजाब हॉटमेल, नई दिल्ली/जालंधर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तेल-गैस संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है।

इसके तहत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के उत्पादन, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और खपत से जुड़ी सभी कंपनियों को अब सरकार के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (Petroleum Planning and Analysis Cell) के साथ ताज़ा डेटा साझा करना अनिवार्य होगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि Essential Commodities Act की धारा 3 के तहत जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार पीपीएसी को डेटा संग्रह, संकलन और विश्लेषण की अधिकृत एजेंसी बनाया गया है।

इससे आपात स्थिति में सरकार को बेहतर योजना बनाने और आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

उल्लंघन पर सख्त सजा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि धारा 3 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन अपराध माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, यहां तक कि जेल की सजा भी हो सकती है।

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?

यह कानून सरकार को जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता उचित कीमतों पर सुनिश्चित करने, जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने, स्टॉक सीमा तय करने और व्यापार को विनियमित करने का अधिकार देता है। धारा 5 के तहत केंद्र सरकार इन शक्तियों को राज्यों को भी सौंप सकती है।

तकई देशों से आयात पर निर्भर भारत

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस, अमेरिका, वेनेजुएला समेत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। वहीं प्राकृतिक गैस अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस जैसे देशों से मंगाई जाती है।

सरकार का यह कदम बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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