जालंधर में GST का बड़ा शिकंजा: 55.35 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, कई एक्सपोर्ट कंपनियां जांच के घेरे में!
रामसंस कॉर्पोरेशन का मालिक गिरफ्तार, AI से पकड़ा गया पूरा नेटवर्क… पढ़ें और देखें
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Punjab Hotmail, जालंधर। जीएसटी विभाग ने जालंधर में करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए रामसंस कॉर्पोरेशन के संचालक भूपिंदर सिंह को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि फर्जी कारोबार दिखाकर सरकार को 8.35 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का चूना लगाया गया।
विभाग का मानना है कि 55.35 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की इस चेन में कई एक्सपोर्ट कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।
इन कंपनियों पर ब्लैक मनी को व्हाइट करने, टैक्स चोरी करने और एक्सपोर्ट इंसेंटिव स्कीमों का गलत फायदा उठाने के आरोपों की गहन जांच की जा रही है।
एआई ने खोली फर्जी बिलिंग की परतें
जीएसटी विभाग अब ‘बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स’ नामक एडवांस एआई सिस्टम की मदद से टैक्स चोरी का पता लगा रहा है। यह सॉफ्टवेयर बिलों में दर्ज ट्रक नंबरों का मिलान फास्टैग और वाहन पोर्टल के डेटा से करता है।
जांच में सामने आया कि जिन ट्रकों के जरिए करोड़ों रुपये का माल दिखाया गया, वे वास्तव में कभी टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं। एआई ने पूरे फर्जी नेटवर्क की डिजिटल चेन तैयार कर अधिकारियों को अलर्ट भेजा, जिसके बाद यह बड़ा खुलासा हुआ।
एक कमरे में 8 फर्में, कागजों में दौड़ते रहे ट्रक
जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्जी कंपनियां एक ही छोटे से कमरे के पते पर रजिस्टर्ड थीं। इन्हीं फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के नकली इनवॉयस जारी किए गए।
कबाड़ कारोबार की आड़ में बिना माल खरीदे-बेचे सिर्फ कागजों पर कारोबार दिखाया गया और फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट व रिफंड का दावा किया गया।
कबाड़ कारोबार बना टैक्स चोरी का जरिया
जांच एजेंसियों के अनुसार कबाड़ का अधिकांश कारोबार नकद में होता है और कई बार बिना बिल के माल खरीदा-बेचा जाता है।
फैक्ट्रियां रिकॉर्ड पूरा करने के लिए ऐसी फर्जी फर्मों से बिल खरीद लेती हैं, जिससे टैक्स चोरी और ब्लैक मनी को वैध दिखाने का खेल चलता है।
लोहे और प्लास्टिक के कबाड़ का स्पष्ट स्रोत साबित करना भी मुश्किल होता है, जिसका फायदा जालसाज उठाते हैं।📊
अब तक 302.35 करोड़ का फर्जी कारोबार उजागर
जीएसटी विभाग की कार्रवाई में अब तक 22 फर्जी फर्मों का खुलासा हो चुका है। इन कंपनियों ने 302.35 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर सरकार को 52.75 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया।
इनमें स्क्रैप सिंडिकेट, लोहा मंडी फर्जीवाड़ा, प्लास्टिक दाना सप्लायर गिरोह और अब रामसंस कॉर्पोरेशन का मामला प्रमुख है।
डीसीएसटी पवनजीत सिंह ने कहा कि जांच लगातार जारी है और फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़ी हर फर्म और व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
