जालंधर की इंडस्ट्री पर छाए संकट के बादल, लेबर-मजदूरों के पलायन से व्यापारियों की चिंताए बढ़ी
व्यापारी बोले- पंजाब में रोजी-रोटी दी, जब जरूरत है तो छोड़कर भागना ठीक नहीं, प्रशासन से मिलकर समाधान निकालेंगे
मनमोहन सिंह (पंजाब हॉटमेल)
जालंधर। भारत-पाकिस्तान के बीच जंगी माहौल के बीच पलायन हो रही जालंधर की लेबर ने व्यापारियों के माथे पर स्किन ला दी है। जालंधर की इंडस्ट्री पर संकट के बादल छाए हुए हैं क्योंकि एक लाख से अधिक लेबर तो फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल एरिया में काम करते हैं बाकी शहर में अन्य इंडस्ट्री का यही हाल है। व्यापारी परेशान हैं, जो लेबर छुट्टी पर गई तो वह लौटी नहीं और जंग के बीच बाकी रुकना नहीं चाहते। शनिवार को इसकी तस्वीर जालंधर शहर रेलवे स्टेशन पर भी नजर आई जब सैकड़ों की संख्या में लेकर प्लेटफार्म पर ट्रेन के इंतजार में बैठी थी। व्यापारियों ने कहा कि ये हालात भागने के नहीं है, जब जरूरत थी तो रोजी-रोटी यहीं मिली है और अब पंजाब को जरूरत है तो भाग रहे हो। व्यापारियों ने कहा कि लेबर का पलायन रोकने के लिए प्रशासन से मिलेंगे ताकि उन्हें सुरक्षा और जंग के माहौल में कैसे रहना है इसकी सही जानकारी दी जा सके और पलायन को रोक सकें। जालंधर में पहले कंट्रक्शन लेबर, फिर वेंडर और अब फैक्ट्री मजदूर पलायन कर रहे हैं।
हालात इंडस्ट्री के अनुकुल नहीं है, लेबर चली जाएगी तो कारखाने बंद हो जाएंगे: सग्गू
फोकल प्वाइंट इंडस्ट्री लेबर के पलायन से परेशानी से जूझ रही है, लोग समझ नहीं रहे हैं कि अभी एक साथ खड़े होने की जरूरत है। जब जरूरत थी तो रोजी-रोटी यहीं मिली है और अब साथ छोड़कर भाग जाना ठीक नहीं।

पहले कंट्रक्शन लेबर गई, फिर वेंडर और अब फैक्ट्री मजदूर, ऐसा ही रहा तो कारखाने बंद करने पड़ेंगे। कल प्रशासन से मिलकर हल निकलवाएंगे, ताकि लेबर के पलायन को रोक सकें, वह जंग के हालात से डरे हुए हैं। नरिंदर सग्गू (फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान)
दुकानों में काम करने वाली लेबर को संभाल रहे, मजदूर और दिहाड़ीदारों का काम खत्म हो गया: धीर
जंग के हालत के बीच छोटी इंडस्ट्री और दुकानोंके अंदर काम करने वाली लेबर क्लास को मालिकों ने संभाल कर रखा है और उनकी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। परेशानी तो मजदूर और दिहाड़ीदारों को हुई है जो डर की वजह से काम ही नहीं कर पा रहे।

इस वजह से वह घर लौट जाना चाहते हैं क्योंकि जिंदगी ज्यादा जरूरी है। मजदूरों को डरने की जरूरत नहीं थी प्रशासन उनके साथ खड़ा है व्यापारिक इकाइयां चल रहे मालिक भी, फिर भी लेबर डरी हुई है। रविंदर धीर (पंजाब स्पोर्ट्स व्यापारी संगठन के प्रधान)
छोटी इंडस्ट्री अभी पैरों पर खड़ी हो पाई है लेबर चली गई तो अब नहीं संभलेंगे
मजदूरों के पलायन से छोटी इंडस्ट्री वाले भी परेशान हैं। क्योंकि लेबर के जाने से जो काम अभी पटरी पर लौटा है फिर से ठप्प हो जाएगा। लोगों को डर लग है क्योंकि इमरजैंसी जैसे हालात है इससे सरकार और सेना निपट रही है।

सिर्फ उन्हीं मजदूरों को रोक पाए हैं जिन्हें इकाइयों में घर और सभी सुविधाएं देकर रखा है, जिनके सुख-दुख में खड़े रहे हैं बाकी तो छोड़कर भाग रहे हैं। हरविंदर सिंह (राजिंदरा सर्जिकल इंडस्ट्रीज के मालिक)
छुट्टी पर गई लेबर लौटी नहीं, अब कारखाने चलेंगे या नहीं सोमवार को पता चलेगा: कलेर
लैदर कांप्लेक्स में मजदूरों की कमी बढ़ गई है, समझाने के बावजूद लोग छुट्टी लेकर घर जा रहे हैं और जो गए थे वह लौटे नहीं। हालात यह हैं कि सोमवार को पता चलेगा कि कारखाने चलेंगे या ताले लग जाएंगे।

जंग के हालात हैं समझ रहे हैं पर लोग इस कदर डरे हुए हैं कि उन्हें घर दिखाई दे रहा है। ज्यादातर लेबर बिहार की है जो पलायन कर चुकी है। स्टीवन कलेर (लैदर इंडस्ट्री व्यापारी)