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ED के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह की सियासी एंट्री, ‘वारिस पंजाब दे’ में होंगे शामिल!

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अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने घर पहुंचकर दिया पार्टी में शामिल होने का न्योता; नशा, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को बताया पंजाब के बड़े मुद्दे

Punjab Hotmail Bureau, जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह बुधवार को खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे। निरंजन सिंह ने स्वयं इसकी पुष्टि की है।

पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह और सांसद अमृतपाल सिंह खालसा। फोटो साभार- सोशल मीडिया

उन्होंने बताया कि उन्हें सेवानिवृत्त हुए करीब पांच-छह साल हो चुके हैं। उनके मुताबिक, पंजाब में नशे की समस्या, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था गंभीर मुद्दे हैं और राज्य में अब बदलाव की जरूरत है।

तरसेम सिंह ने घर पहुंचकर दिया न्योता

निरंजन सिंह ने बताया कि सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह मंगलवार को उनके घर आए थे। उन्होंने निरंजन सिंह से मुलाकात कर उन्हें पार्टी के साथ जुड़ने का न्योता दिया। इसके बाद उन्होंने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होने का फैसला लिया।

‘सभी सरकारें नशा खत्म करने का वादा करती रहीं’निरंजन सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दल सत्ता में आने से पहले नशा खत्म करने के वादे करते रहे, लेकिन इसके बावजूद समस्या बरकरार है।

उन्होंने कहा कि पंजाब में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में पहले शिरोमणि अकाली दल की सरकार रही, लेकिन उनके अनुसार उस दौरान भी लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिली।

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी, लेकिन उनके अनुसार वह सरकार भी माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने में सफल नहीं रही। निरंजन सिंह ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान नशे से जुड़े लोगों को संरक्षण मिला।

अमृतपाल सिंह के मामले पर बोले—अदालत का फैसला होगा अंतिम

सांसद अमृतपाल सिंह पर लगे आरोपों को लेकर निरंजन सिंह ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और अदालत फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।

भोला ड्रग रैकेट की जांच में निभाई अहम भूमिका

ED के जालंधर कार्यालय में लंबे समय तक तैनात रहे निरंजन सिंह पंजाब से जुड़े कई चर्चित मामलों की जांच का हिस्सा रहे। इनमें ड्रग्स से अर्जित धन की मनी लॉन्ड्रिंग और फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) से जुड़े मामले शामिल थे।

वर्ष 2012 में राजा कंडोला के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 2013 में अनूप काहलों से जुड़े ड्रग मामले की जांच संभाली गई। आगे की जांच जगदीश सिंह भोला से जुड़े करीब 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट की मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक पहुंची।

ED ने वर्ष 2013 में PMLA के तहत मामला दर्ज कर ड्रग कारोबार से अर्जित धन, संपत्तियों और लेन-देन की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान 73 लोगों को आरोपपत्र में शामिल किया गया, जिनमें भोला के परिवार के 11 सदस्य भी बताए गए।

करीब 24 आरोपियों की 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की गई थीं। वर्ष 2024 में विशेष अदालत ने जगदीश सिंह भोला समेत 17 लोगों को दोषी ठहराया था।

2014 में बिक्रम सिंह मजीठिया से भी हुई थी पूछताछ

26 दिसंबर 2014 को ED ने तत्कालीन पंजाब के राजस्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से जालंधर कार्यालय में पूछताछ की थी। यह पूछताछ भोला ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में हुई थी।

पूछताछ के दौरान निरंजन सिंह के साथ ED के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।इस मामले में जगदीश सिंह भोला ने मजीठिया का नाम लिया था, जबकि मजीठिया ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था।

2016 में प्रमोशन, 2018 में ED छोड़ने का फैसला

वर्ष 2016 में निरंजन सिंह को सहायक निदेशक से उपनिदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 2018 में ED छोड़ने का फैसला किया था, जबकि उनकी औपचारिक सेवानिवृत्ति 31 मई 2021 को हुई।

अब निरंजन सिंह के अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होने के फैसले को पंजाब की राजनीति में उनकी नई भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।

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