पंजाब विधानसभा में सियासी तूफान: हंगामा, वॉकआउट और फ्लोर टेस्ट की तैयारी… डोप टेस्ट की मांग ठुकराई, बढ़ा विवाद!
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पंजाब हॉटमेल, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। भगवंत मान की मौजूदगी में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार बाधित करनी पड़ी।
इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बहुमत साबित करने के लिए विश्वास मत (फ्लोर टेस्ट) लाने के संकेत दिए हैं।

डोप टेस्ट की मांग ठुकराई, बढ़ा विवाद
स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मुख्यमंत्री और विधायकों के डोप टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया। यह मांग नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की ओर से उठाई गई थी। इस फैसले के बाद सदन में बहस और तेज हो गई।
सदन में तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप
कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस और AAP विधायकों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई। सुखपाल सिंह खैहरा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें व्यक्तिगत टिप्पणियों तक मामला पहुंच गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।
फ्लोर टेस्ट क्यों? समझिए पूरा गणित
AAP सरकार के फ्लोर टेस्ट लाने के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:6 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा: जिनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक सहित अन्य नाम शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी।
MLA मीटिंग में कम उपस्थिति: 94 में से सिर्फ 65 विधायक ही मीटिंग में पहुंचे, जिससे असंतोष की अटकलें तेज हुईं।
चुनाव से पहले रणनीति: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले AAP अपनी ताकत दिखाकर विपक्ष को जवाब देना चाहती है।
राजनीतिक आरोपों का दौर जारी
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों के अपमान का आरोप लगाया, हालांकि इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सियासत गरम, नजरें फ्लोर टेस्ट पर
विधानसभा में जारी इस सियासी घमासान ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फ्लोर टेस्ट में AAP सरकार अपनी बहुमत की ताकत किस तरह साबित करती है।
