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गोवा की प्राइम 8 एकड़ जमीन पर सियासी संग्राम: चन्नी पर विजिलेंस की नजर, धारा 17A के तहत दोबारा मांगी मंजूरी… बढ़ेंगी मुश्किलें!

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पंजाब हॉटमेल, चंडीगढ़/जालंधर। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से लोकसभा सांसद Charanjit Singh Channi के खिलाफ गोवा में स्थित पंजाब सरकार की प्राइम प्रॉपर्टी को कथित तौर पर कम दरों पर लीज पर देने के मामले में विजिलेंस ब्यूरो (VB) ने राज्य सरकार से नई मंजूरी मांगी है।

यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत की गई है, जिसके अनुसार किसी भी लोकसेवक के आधिकारिक कार्यकाल में लिए गए फैसलों की जांच शुरू करने से पहले संबंधित सरकार की पूर्व स्वीकृति जरूरी होती है।


क्या है पूरा मामला?

मामला उस समय का है जब Charanjit Singh Channi सितंबर 2021 से मार्च 2022 तक पंजाब के मुख्यमंत्री थे। आरोप है कि गोवा में पंजाब पर्यटन विभाग की लगभग 8 एकड़ समुद्र-तटीय जमीन को एक निजी होटल कारोबारी को बाजार मूल्य से बेहद कम दर—करीब ₹1 लाख प्रतिमाह—पर लीज पर दिया गया।

विजिलेंस अधिकारियों का दावा है कि यह जमीन करोड़ों रुपये की है और लीज प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ। बताया जा रहा है कि इस संपत्ति में तीन पर्यटन-संबंधित संस्थाओं की हिस्सेदारी थी, लेकिन दो निजी कंपनियों की सहमति के बिना ही लीज फाइनल कर दी गई।


पहले भी उठा था मुद्दा

28 जून 2023 को पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने विधानसभा में कहा था कि यह लीज “कौड़ियों के भाव” पर दी गई। इसके बाद लीज को रद्द कर विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए थे।

अक्टूबर 2023 में भी विजिलेंस ने जांच की अनुमति मांगी थी, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। अब एक बार फिर से ताजा प्रस्ताव भेजकर औपचारिक केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। फाइल को संसदीय कार्य विभाग को भेजा गया है।


चन्नी का पलटवार: “राजनीतिक बदले की कार्रवाई”

चन्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उनका कहना है:

  • “फाइल प्रशासनिक सचिव के माध्यम से मंत्री तक जाती है, नियमों की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है।”
  • “सरकार ने खुद लीज रद्द कर दी और कब्जा कभी सौंपा ही नहीं गया, तो नुकसान कैसे हुआ?”
  • “मेरी लोकप्रियता से घबराकर झूठा मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।”

आगे क्या?

अब सबकी नजर राज्य सरकार की मंजूरी पर टिकी है। यदि अनुमति मिलती है तो विजिलेंस ब्यूरो औपचारिक एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर सकता है।

यह मामला आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चन्नी कांग्रेस का प्रमुख दलित चेहरा माने जाते हैं और जालंधर से मौजूदा सांसद हैं।


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