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वक्त बदला, रास्ते बदले… लेकिन पुराने साथियों का रिश्ता नहीं बदला

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बीमारी से जूझ रहे अपने साथी के लिए एकजुट हुए पुराने विद्यार्थी, मदद के लिए बढ़े हाथ तो नम हो गईं आंखें

पंजाब हॉटमेल, जालंधर। स्कूल-कॉलेज के दिनों में साथ बैठकर पढ़ने वाले, एक-दूसरे के साथ हंसने-खेलने वाले और जिंदगी के सुनहरे पल साझा करने वाले दोस्त जब सालों बाद भी एक-दूसरे के सुख-दुख में उसी तरह खड़े नजर आएं, तो यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि रिश्तों की वह ताकत होती है जिसे वक्त भी कमजोर नहीं कर पाता।

बीमारी के संकट पर ओएमए अध्यक्ष अमरजोत सिंह के नेतृत्व में राजकरण सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खी रूपरा, हरदीप सिंह, डॉ. परमदीप सिंह और गुरकरन सिंह ने परिवार को चेक और नकद आर्थिक सहायता सौंपी। इस दौरान एमजीएन के प्रिंसिपल भी मौजूद रहे।

कुछ ऐसा ही भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब ओल्ड मोंटगोमरी एसोसिएशन स्टूडेंट्स (ओएमए) के एक पुराने साथी के परिवार पर बीमारी का संकट आया। इलाज के दौर से गुजर रहे अपने साथी की मदद के लिए पुराने विद्यार्थी एक बार फिर उसी तरह साथ खड़े हो गए, जैसे कभी विद्यार्थी जीवन में एक-दूसरे के साथ खड़े हुआ करते थे।

ओएमए अध्यक्ष अमरजोत सिंह के नेतृत्व में राजकरण सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खी रूपरा, हरदीप सिंह, डॉ. परमदीप सिंह और गुरकरन सिंह ने परिवार को चेक और नकद आर्थिक सहायता सौंपी। इस दौरान एमजीएन के प्रिंसिपल भी मौजूद रहे।

यह मदद महज कुछ रुपये या एक चेक नहीं था। यह उस पुराने रिश्ते की कीमत थी, जिसे वर्षों और दूरियों ने कभी खत्म नहीं किया। जिस साथी के साथ कभी कक्षा में बैठकर भविष्य के सपने देखे गए थे, आज उसी के मुश्किल वक्त में पुराने सहपाठी उसके परिवार के लिए सहारा बनकर सामने आए।

मदद सौंपते समय माहौल भावुक हो गया। किसी के चेहरे पर चिंता थी, किसी की आंखों में अपने साथी के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना और दिल में यही उम्मीद कि जिस दोस्त ने कभी जिंदगी के सफर में साथ दिया था, आज उसे अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

ओएमए की ओर से मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार को इस कठिन घड़ी में हिम्मत देने के लिए वाहेगुरु से अरदास की गई।

इस मानवीय प्रयास में एसजीएल अस्पताल के एस. मनिंदर सिंह रियार और ग्लोबल अस्पताल के डॉ. नवजोत दहिया द्वारा चिकित्सा सहायता और उपचार में सहयोग की पेशकश के लिए विशेष आभार जताया गया।

सबसे भावुक बात शायद यही है कि कक्षाएं छूट गईं, किताबें बंद हो गईं, जिंदगी अपने-अपने रास्तों पर आगे बढ़ गई… लेकिन दोस्ती की वह हाजिरी आज भी लगी हुई है।

ओएमए ने सभी मोंटगोमरीयन साथियों का उनकी निरंतर उदारता और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। संस्था ने संदेश दिया कि जरूरत की घड़ी में किसी अपने का हाथ थाम लेना ही सबसे बड़ी सेवा है।

पुराने विद्यार्थी फिर एक बार साथ थे… इस बार किसी परीक्षा में नहीं, बल्कि जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा में अपने साथी के साथ।

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