पितृ पक्ष 2026: आज से शुरू हुआ श्राद्ध पक्ष, जानें श्राद्ध के नियम और पंचबलि की परंपरा!
पंजाब हॉटमेल ब्यूरो, नई दिल्ली/जालंधर। पितरों की पूजा, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला पितृ पक्ष 2026 आज से शुरू हो गया है। इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्तूबर तक रहेगा।

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो। इसके बाद आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष के नियमित श्राद्ध शुरू होते हैं और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के ये दिन पितरों को समर्पित होते हैं। इस दौरान तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

श्राद्ध करते समय इन बातों का रखें ध्यान
🔸 दक्षिण दिशा का महत्व: धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए पितरों के निमित्त तर्पण और पूजा करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की परंपरा है।
🔸 श्राद्ध का समय: जिस तिथि को आपके पितर का श्राद्ध हो, उस दिन परंपरागत रूप से सूर्योदय के बाद निर्धारित श्राद्ध काल में ही श्राद्ध-तर्पण करने की मान्यता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।
🔸 पूजन सामग्री: श्राद्ध कर्म में तिल, कुश, गंगाजल, दूध, शहद और वस्त्र आदि का प्रयोग धार्मिक परंपराओं में किया जाता है।
🔸 तर्पण की विधि: तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की परंपरा बताई गई है। अग्नि से जुड़े कर्मों के लिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा का भी धार्मिक महत्व माना जाता है।
🔸 ब्राह्मण भोजन: श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराने और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठाने की परंपरा है।
🔸 सात्विक भोजन: पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। कई धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध के भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता।
पितृ पक्ष में पंचबलि का विशेष महत्व
श्राद्ध कर्म के दौरान पंचबलि की परंपरा भी बताई गई है। इसमें गाय, कुत्ता, कौआ, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन निकालने की मान्यता है।
🐄 गोबलि: गाय के लिए भोजन निकालते समय ‘गोभ्यो नमः’ मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
🐕 श्वानबलि: कुत्ते के लिए ‘द्वौ श्वानौ नमः’ मंत्र का उच्चारण कर भोजन निकालने की परंपरा है।
🐦 काकबलि: कौए के लिए ‘वायसेभ्यो नमः’ मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
🙏 देवादिबलि: देवताओं के निमित्त ‘देवादिभ्यो नमः’ मंत्र का उच्चारण कर भोजन अर्पित किया जाता है।
🐜 पिपीलिकाबलि: चींटियों के लिए ‘पिपीलिकादिभ्यो नमः’ मंत्र का उच्चारण कर भोजन निकालने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में श्राद्ध की विधि एवं समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय विद्वान या पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करना उचित है।
अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जा रहा है। किसी विशेष श्राद्ध कर्म या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग/धार्मिक विद्वान से परामर्श करें। पंजाब हॉटमेल यहां दी गई जानकारी की पूर्ण सटीकता या संपूर्णता के लिए उत्तरदायी नहीं है।
