पंजाब कांग्रेस में ‘बैकफुट’ पर चन्नी गुट! हाईकमान के सख्त रुख के बाद बदले सुर, बघेल पर लगाए ये आरोप?
बघेल से होगी अहम मुलाकात; अगले 48 घंटे तय करेंगे सियासी भविष्य
Punjab Hotmail, चंडीगढ़/जालंधर। पंजाब कांग्रेस में पिछले कई दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में चल रही नाराजगी अब नरम पड़ती नजर आ रही है।

हाईकमान के सख्त रुख और स्पष्ट संदेश के बाद चन्नी गुट के दो वरिष्ठ नेता AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे।
इस बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक राणा गुरजीत सिंह और विधायक परगट सिंह के तेवर भी पहले के मुकाबले काफी बदले हुए दिखाई दिए।
सभी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस में किसी तरह का गतिरोध नहीं है और सभी मिलकर हर मुद्दे का समाधान निकालेंगे।

सूत्रों के अनुसार, चरणजीत सिंह चन्नी पहले दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल सका।
इसके बाद चन्नी गुट ने चंडीगढ़ में विधायक राणा गुरजीत के आवास पर लगातार तीसरी बैठक की, जिसमें भूपेश बघेल से मुलाकात कर अपनी बात रखने का फैसला लिया गया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि चन्नी गुट अब टकराव की बजाय बातचीत के जरिए समाधान चाहता है।
वहीं दूसरी ओर, पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल लगातार स्पष्ट कर रहे हैं कि हाईकमान का फैसला किसी भी कीमत पर नहीं बदलेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी कोई “गुड्डे-गुड्डी का खेल” नहीं है और सभी नेताओं को संगठन के फैसले का सम्मान करना होगा।
बघेल ने यह भी दोहराया कि पंजाब कांग्रेस की कमान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हाथों में ही रहेगी और संगठन उनके नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगा।
हाईकमान की रणनीति भी अब साफ नजर आ रही है। भूपेश बघेल ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी की असली ताकत संगठन है। उन्होंने बताया कि पंजाब के 23 जिलों के कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के साथ मजबूती से खड़े हैं।
चुनाव में टिकट किसे मिलेगा, इसका फैसला बाद में होगा, लेकिन जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत रखने में जिला अध्यक्षों की भूमिका सबसे अहम होती है।
यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल राजा वड़िंग पर पूरा भरोसा जता रहा है।उधर, विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भी बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस में “ऑल इज वेल” है और हाईकमान से बड़ा कोई नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है और उचित समय आने पर सभी बातें सुलझ जाएंगी। सांसद सुखजिंदर रंधावा ने भी कहा कि पूरी पंजाब कांग्रेस एकजुट है और सभी नेता मिलकर विवाद का समाधान निकालेंगे।
वहीं विधायक परगट सिंह ने भी साफ कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार का डेडलॉक नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस के लिए अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
यदि चन्नी गुट पूरी तरह बिखर गया तो पार्टी में उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है। वहीं यदि उनके समर्थक एकजुट रहते हैं तो दलित वोट बैंक पर संभावित असर को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान भविष्य में चन्नी के साथ संवाद का रास्ता भी खोल सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें भूपेश बघेल और चन्नी गुट की प्रस्तावित मुलाकात पर टिकी हैं, जो पंजाब कांग्रेस की आगे की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
