नेपाल में जलप्रलय का कहर: हाइड्रोपावर सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज; अबतक 675 मौतें हुई
पंजाब हॉटमेल, काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे या लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

6 इंच के छेद से पहुंचाई जा रही हवा, मैनहोल बनाने की तैयारी
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में रेस्क्यू टीम को कुछ सफलता मिली है। बाढ़ के पानी के साथ सुरंग में भारी मात्रा में मिट्टी और गाद भर गई थी। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हैं।

सुरंग के ऊपरी हिस्से में करीब 6 इंच का छेद किया गया है, जिसके जरिए पाइप से अंदर हवा पहुंचाई जा रही है। रेस्क्यू टीम अब इस छेद को और बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि बचावकर्मी सुरंग के अंदर प्रवेश कर फंसे लोगों की तलाश कर सकें।

हालांकि अभी तक अंदर मौजूद किसी व्यक्ति से सीधा संपर्क नहीं हो पाया है।
अलर्ट में देरी पर उठे सवाल, 7:30 बजे पता चला खतरा तो 9:15 बजे आया SMS
बाढ़ के बाद सरकारी अलर्ट की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 7:30 बजे लोगों को खतरे का पता चल गया था, जबकि रसुवा जिला प्रशासन को चीन की ओर से बाढ़ की सूचना करीब 9 बजे मिली। इसके बाद 9:15 बजे करीब छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया।

40 किलोमीटर हाईवे मलबे में दबा, कई गांव सड़क संपर्क से कटे
बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा प्रभावित हुआ है। रसुवा और नुवाकोट के 18 से ज्यादा पहाड़ी गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। कई इलाकों तक अब सिर्फ पैदल या हेलिकॉप्टर के जरिए पहुंचा जा रहा है।
बाढ़ में कई पुल भी बह गए हैं। नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले रसुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज को दोबारा जोड़ने की कोशिश जारी है। सेना हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी है।

नेपाल में 675 मौतें, तिब्बत में 16 लोगों की जान गई
इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में अब तक 675 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। तबाही के बाद राहत, बचाव और पुनर्वास का काम लगातार जारी है।
