झोटा हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजस्थान से गिरफ्तारी की खबर: फिर भी पंजाब में उबाल, विधायक अयाली समेत 50 से अधिक समर्थक हिरासत में!
मानसा में न्याय की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना जारी, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान; मानसा जा रहे नेताओं और समर्थकों को कई जगह रोकने की खबर!
पंजाब हॉटमेल ब्यूरो, पंजाब/मानसा। पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसके बावजूद परिजनों और समर्थकों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार को मानसा में चल रहे धरने में शामिल होने जा रहे दाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत 50 से अधिक समर्थकों को लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने हलवारा में रोककर हिरासत में ले लिया।
उधर, मोगा में भी विभिन्न संगठनों के नेताओं को मानसा जाने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा सुबह करीब 3 बजे से उनके घरों पर पहुंचकर हिरासत में लेने की खबरें सामने आई हैं।
राजस्थान से मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुलिस की जांच जारी
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में मुख्य आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को पुलिस ने राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया है। मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी को फरार होने में कथित तौर पर मदद करने के आरोप में पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब हत्याकांड से जुड़े अन्य पहलुओं और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद मृतक के परिजन और समर्थक संतुष्ट नहीं हैं।
उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।
मानसा जा रहे विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत 50 से अधिक समर्थक हिरासत में
झोटा हत्याकांड के विरोध में मानसा में आयोजित धरने में शामिल होने जा रहे दाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और उनके 50 से अधिक समर्थकों को बुधवार को हलवारा में पुलिस ने रोक लिया।
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर रायकोट की तरफ किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। घटना के बाद हलवारा चौक पर पुलिस बल तैनात रहा।
इसी तरह मोगा में भी विभिन्न संगठनों के नेताओं को मानसा पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने सुबह करीब 3 बजे से उनके घरों पर पहुंचकर हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
संगठनों के नेताओं ने मानसा पहुंचकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बनाई थी। हालांकि, विभिन्न स्थानों पर हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या और उन्हें कहां रखा गया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मानसा में अनिश्चितकालीन धरना, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का ऐलान
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में परिजनों और समर्थकों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
मामले को लेकर गठित कमेटी ने 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे तथा मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।
परिजनों और समर्थकों ने मांगें पूरी होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने और धरना जारी रखने का रुख अपनाया है।
फेसबुक लाइव के दौरान मेडिकल स्टोर संचालक से हुआ था विवाद
परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे। मंगलवार को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की कथित बिक्री को लेकर उनका दुकानदार से विवाद हो गया था।
घटनाक्रम के दौरान झोटा फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। इसी बीच गोली चलने से उनकी मौत हो गई।घटना में उनके चार अन्य साथियों के घायल होने की भी खबर है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई थी।
हत्याकांड के बाद मानसा में तनाव फैल गया और लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई।
गिरफ्तारी के बावजूद प्रदर्शनकारी क्यों नहीं मान रहे बात?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। मामले की तह तक पहुंचकर यह पता लगाया जाना चाहिए कि घटना के पीछे क्या कारण थे और क्या इसका संबंध नशे के अवैध कारोबार से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क से है।
उनकी मांग है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
पुलिस की कार्रवाई के बीच कानून-व्यवस्था की चुनौतीमानसा में धरने में शामिल होने जा रहे नेताओं और समर्थकों को अलग-अलग स्थानों पर रोकने की कार्रवाई से मामला और गरमा गया है।
15 अक्टूबर को प्रस्तावित पंजाब बंद को देखते हुए प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।
एक तरफ परिजन और प्रदर्शनकारी न्याय की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन के सामने विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और पुलिस प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और हत्याकांड की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
