जालंधर में गूंजा श्रीमद् भागवत का अमृत संदेश: आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी ने कहा- सत्कर्म ही जीवन की सच्ची पूंजी, भगवन्नाम सभी विपत्तियों का नाश करने वाला
पंजाब हॉटमेल ब्यूरो, जालंधर। साई दास स्कूल ग्राउंड, पटेल चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन का आयोजन भक्तिभाव, आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा।

कथा व्यासपीठ से श्रद्धेय आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने श्रीमद् भागवत की दिव्य महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और जीवन के सच्चे मार्ग का संदेश दिया।

आचार्य श्री ने श्रीमद् भागवत के संदेश को समझाते हुए कहा कि भगवान को न कोई प्रिय है और न अप्रिय, उनका न कोई अपना है और न पराया। वे सभी प्राणियों की आत्मा हैं और इसलिए सभी के प्रियतम हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण मात्र पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और जिस स्थान पर श्रद्धा से भागवत कथा होती है, वहां स्वयं भगवान का वास माना जाता है।
“जब से देखा तुम्हें, जाना क्या हो गया — मेरा बन जा बिहारी, तेरा हो गया।” भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। कथा में स्वामी शांतानंद जी महाराज, मुख्य अतिथि के रूप में बाबा हेनरी, रमीत दत्ता, बलजीत सेम्बी, गौरव, गौरव भंडारी, मुनीष सचदेवा, दीपक प्रधान ने शिरकत की।
‘भगवन्नाम का जाप सभी विपत्तियों का नाश करने वाला’
आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी ने कहा कि भगवन्नाम का जाप सभी विपत्तियों का नाश करने वाला है, क्योंकि इस संसार में भगवत कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

उन्होंने जीवन में दमन और उदारीकरण के दोनों मार्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी मार्ग पर चलते हुए मनुष्य के लिए अपनी अधोगामी वृत्तियों का त्याग करना आवश्यक है।
‘जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा’
मानव जीवन में सत्कर्मों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने श्रीकृष्ण के वचनों का उल्लेख किया कि कर्म ही प्रधान है और मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि सत्कर्म करने वाला शुभ फल प्राप्त करता है, जबकि दुष्कर्म मनुष्य के जीवन में दुख का कारण बनते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्मों की ओर अग्रसर रहना चाहिए।

गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग से दिया मोक्ष का संदेश
कथा के दौरान गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी दुराचारी क्यों न रहा हो, यदि वह पूरी श्रद्धा और मनोयोग से भागवत कथा का श्रवण करे तो उसके जीवन में भी परिवर्तन संभव है और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

उन्होंने धुंधकारी के मोक्ष को इसका उदाहरण बताया । आचार्य श्री ने कथा के समापन पर कहा कि भागवत कथा अमृत के समान है। इसका जितना श्रवण किया जाए, आत्मा की तृप्ति उतनी ही बढ़ती जाती है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर ज्ञान और वैराग्य की भावना स्वतः जागृत होती है।
कथा में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
इस अवसर पर यशपाल चौधरी, अभिषेक चौधरी, सुनील नय्यर, उमेश औहरी, संदीप मलिक, चंदन वडेरा, ब्रिज मोहन चड्ढा, महेश मखीज, अंकुश जुनेजा, अश्वनी कुमार (आशू), संजय सहगल, हेमंत थापर, राजवंश मल्होत्रा, देवेंद्र अरोड़ा, रिंकू मल्होत्रा, बलविंदर शर्मा, सोनू चोपड़ा, सुमित गोयल,

पंडित श्री कपिल देव शर्मा, संदीप कुमार, भूपेंद्र सिंह (बिल्ला), तरुण सरीन, जितेंद्र सोनू, राजेश बीगामल, तरसेम रिंकू, अरुण मल्होत्रा, राहुल शर्मा और राहुल बाहरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया और श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
