जन्माष्टमी पर मंदिरों में केक काटने की परंपरा बंद हो: श्री हिंदू तख्त
काली माता मंदिर पटियाला के सेवादारों की अपील- जन्मोत्सव को पार्टी नहीं, भजन-कीर्तन और धार्मिक विधि-विधान से मनाएं
पंजाब हॉटमेल, पटियाला (ब्यूरो)। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को लेकर अखिल भारतीय जागरण सुधार मंडल और श्री हिंदू तख्त काली माता मंदिर, पटियाला की ओर से श्रद्धालुओं से सनातन धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का पालन करने की अपील की गई है।

संगठन ने मंदिरों में जन्माष्टमी के अवसर पर केक काटने की परंपरा बंद करने का आह्वान किया है।संगठन की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का पवित्र पर्व है।
इसे जन्मदिन की पार्टी की तरह मनाने के बजाय भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठानों, श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के माध्यम से श्रद्धा एवं धार्मिक भावना के साथ मनाया जाना चाहिए।

“मंदिरों में केक काटने की रस्म को बढ़ावा न दें”
श्री हिंदू तख्त काली माता मंदिर पटियाला के सेवादारों ने मंदिरों में जन्माष्टमी के दौरान केक काटने वालों से ऐसा न करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और सनातन परंपराओं का सम्मान करना सभी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है।
संगठन ने श्रद्धालुओं से अपील की कि जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण को माखन सहित पारंपरिक प्रसाद का भोग लगाया जाए तथा मंदिरों में भजन, कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
संगठन की प्रमुख अपील
- मंदिरों में जन्माष्टमी पर केक काटने की परंपरा बंद की जाए।
- भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाए।
- श्री कृष्ण को माखन सहित पारंपरिक प्रसाद का भोग लगाया जाए।
- सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आस्था की गरिमा बनाए रखी जाए।
“अभी प्रेम से अपील कर रहे हैं, नहीं माने तो सख्ती करनी पड़ेगी”
पंजाब प्रधान, काली माता मंदिर पटियाला जगदीप शर्मा ने कहा कि संगठन फिलहाल श्रद्धालुओं से प्रेमपूर्वक अपील कर रहा है कि जन्माष्टमी को धार्मिक मर्यादा के अनुसार मनाया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि लोग अपील नहीं मानते तो संगठन को सख्ती का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात यह है कि कुछ हिंदू स्वयं सनातन परंपराओं का कथित तौर पर मजाक बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संगठन नहीं चाहता कि अपने ही समाज के लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की नौबत आए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि जन्माष्टमी को जन्मदिन की पार्टी का स्वरूप देने के बजाय भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मनाया जाए।
