जालंधर की इस नगर काउंसिल में घोटाले का बड़ा खुलासा: रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर प्रधान, पूर्व प्रधान और क्लर्क पर केस दर्ज… आखिर क्या छुपाना चाहते थे, पढ़ें
सीक्रेट रिकॉर्ड में बदलाव के बाद रजिस्टर्स को वापस रिकॉर्ड रूम में रख वहां से निकल गए थे सभी आरोपी
पंजाब हॉटमेल, जालंधर (मनमोहन सिंह): नकोदर में नगर कौंसिल से जुड़े एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। नगर कौंसिल प्रधान नवनीत ऐरी, पूर्व प्रधान आदित्य भटारा और सस्पेंडेड क्लर्क अशोक कुमार पर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में केस दर्ज किया गया है।

मामला सामने आने के बाद तीनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 25 सितंबर को ईओ रणधीर सिंह मीटिंग के लिए जालंधर गए थे।
उनके जाते ही पूर्व प्रधान आदित्य भटारा मौजूदा प्रधान नवनीत ऐरी के साथ कौंसिल ऑफिस पहुंचे और क्लर्क अशोक कुमार को कमरे में बुलाया गया। दोनों प्रधान पहले से मौजूद थे।
आरोप है कि कमरे में मौजूद सेवादारों को बाहर भेजने के लिए एक अजीब तरकीब अपनाई गई।
प्रधान नवनीत ऐरी ने क्लर्क अशोक को 200 रुपये देकर सेवादार ऊषा रानी के लिए पकौड़े लाने को कहा और 100 रुपये उसे देने के लिए कहा गया, ताकि अंदर की गतिविधियों को गुप्त रखा जा सके।
मामला किस रिकॉर्ड को छिपाने का था?
यह पूरा विवाद प्रॉपर्टी नंबर 276/A से जुड़े रिकॉर्ड को हटाने का है।रजिस्टर नंबर 3 (साल 2003-04) में दर्ज यह प्रॉपर्टी पूर्व प्रधान आदित्य भटारा के परिवार की बताई गई है।
आरोप है कि विजिलेंस जांच से बचने के लिए इस एंट्री को व्हाइटनर या कटिंग के जरिए मिटाया गया। विजिलेंस में पहले से ही आदित्य भटारा की प्रॉपर्टी जांच अधीन है, इसलिए रिकॉर्ड को हटाकर फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
लगाए गए धाराएं: सेक्शन 318(4), 336(2), 336(3): जालसाजीसेक्शन 337: नकली दस्तावेज को असली की तरह इस्तेमाल करनासेक्शन 3(5): कॉमन इंटेंशन (साझा साजिश)।
सीक्रेट रिकॉर्ड में बदलाव के बाद रजिस्टर्स को वापस रिकॉर्ड रूम में रखा गया और सभी आरोपी मौके से निकल गए।
यह मामला नगर कौंसिल में जारी भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है, जिसके बाद पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश तेज कर चुकी है।
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