Canada में नौकरी संकट गहराया: हजारों लोगों ने गंवाई रोज़ी-रोटी, ऐसे हैं हालात… पढ़ें और देखें
सबसे ज्यादा असर पंजाबियों पर, पीआर और स्टडी वीज़ा धारक सबसे अधिक प्रभावित
पंजाब हॉटमेल, जालंधर। कनाडा की अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती का सीधा असर वहां की नौकरियों पर पड़ने लगा है। जुलाई महीने में करीब 40 हजार लोगों की नौकरियां चली गईं, जिससे बेरोजगारी दर 6.9% पर पहुंच गई है।
हालांकि यह दर स्थिर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात देखते हुए यह जल्द ही 7% का आंकड़ा पार कर सकती है।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर पंजाब मूल के प्रवासियों पर पड़ा है, जो बड़ी संख्या में कनाडा में स्टडी वीज़ा या अस्थायी वर्क परमिट पर रह रहे हैं। ओंटारियो, टोरंटो, ब्रैम्पटन और मिसीसागा जैसे इलाकों में, जहां पंजाबी समुदाय की भारी मौजूदगी है, हजारों छात्रों और कर्मचारियों की नौकरियां चली गई हैं।
ओंटारियो में कॉलेज स्टाफ पर गिरी गाज
ओंटारियो में स्टडी वीज़ा पर लगी रोक के चलते करीब 10 हजार कॉलेज फैकल्टी और सहायक कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। स्थानीय यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यह कॉलेज सिस्टम का नहीं, बल्कि कनाडा के लेबर मार्केट का बड़ा संकट है।
सूचना, संस्कृति और मनोरंजन उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
आर्थिक सुस्ती के संकेत देते हुए रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सिर्फ सूचना, संस्कृति और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में ही 29 हजार नौकरियां खत्म हो गईं। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र को भी झटका लगा है। अकेले अल्बर्टा में 17 हजार लोगों ने रोजगार खोया, जिससे वहां 20 हजार से ज्यादा रोजगार अवसर खत्म हो गए।
युवा वर्ग में तेजी से बढ़ रही बेरोजगारी
15 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं में रोजगार दर घटकर 1998 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस आयु वर्ग के सिर्फ 53.6% युवा ही कार्यरत हैं। जुलाई में 16 लाख लोगों को बेरोजगार माना गया, जिनमें छात्रों की बेरोजगारी दर 17.4% दर्ज की गई है।
स्थानीय पंजाबी समुदाय में चिंता
कनाडा के बीसी प्रांत में रहने वाले प्रिंस सन्नण बताते हैं कि हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। “छात्रों के पास काम नहीं है और जिनके पास है, उनकी भी पीआर फाइलें अटक गई हैं। अब स्थायी निवास की उम्मीदें भी धुंधली होती जा रही हैं।
“इस बदतर होती स्थिति को देखते हुए कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है, जिसमें न केवल आर्थिक अस्थिरता है, बल्कि भविष्य की योजना भी अधर में लटकती नजर आ रही है।