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जालंधर: सर्वोदय अस्पताल मेडिकल फ्रॉड केस में अदालत का सख्त रुख, पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल; कोर्ट ने मांगा जवाब! पढ़ें

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पंजाब हॉटमेल, जालंधर। जालंधर के चर्चित सर्वोदय अस्पताल से जुड़े कथित मेडिकल फ्रॉड मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के इस केस में नामजद आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होने पर न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए एडीसीपी सिटी-2 से स्पष्टीकरण तलब किया है।

मामला किनके बीच, किन पर आरोप

यह केस डॉ. पंकज त्रिवेदी बनाम डॉ. राजेश अग्रवाल व अन्य से संबंधित है। मामले में सर्वोदय अस्पताल से जुड़े डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर खान तथा नोएडा निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है।

सभी पर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

FIR का विवरण और धाराएं

थाना नवी बारादरी, जालंधर में FIR नंबर 233 दिनांक 23.12.2025 इलाका मजिस्ट्रेट के आदेश पर दर्ज की गई। इसमें आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 477-A और 120-B लगाई गई हैं, जो गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आती हैं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-8, जालंधर की अदालत ने गैर-जमानती धाराओं के बावजूद गिरफ्तारी न होने पर चिंता जताई। अदालत ने स्पष्ट पूछा कि यदि पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही, तो इसके पीछे ठोस और वैधानिक कारण क्या हैं।

पिछली सुनवाई में पुलिस का पक्ष न्यायालय को अपर्याप्त लगा, जिसके बाद BNSS की धारा 175 के तहत अदालत ने अपने सुपरवाइजरी अधिकारों का प्रयोग किया।

जांच किसके नेतृत्व में

अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच एडीसीपी हरिंदर सिंह गिल की निगरानी में चल रही है। शिकायतकर्ता की ओर से धारा 75 Cr.P.C./79 BNSS के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अर्जी भी दायर की गई है।

आरोप क्या हैं

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर अस्पताल को जानबूझकर घाटे में दिखाया गया तथा पार्टनर्स के साथ धोखाधड़ी की गई।

अब आगे क्याअदालत के सख्त रुख के बाद अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गंभीर मोड़ ले सकता है।

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