फोर्टिस अस्पताल फिर विवादों में: जालंधर में ट्रांसजेंडर को नौकरी से इनकार का आरोप, “पहले बुलाया, फिर पहचान के आधार पर रोका”… आरोप गंभीर!
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पंजाब हॉटमेल, जालंधर (मनमोहन सिंह)। पठानकोट चौक के पास स्थित एक निजी अस्पताल में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब 12वीं पास ट्रांसजेंडर गरजोया ने प्रबंधन पर नौकरी देने से इनकार और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए।

गरजोया का कहना है कि उन्हें पहले नौकरी के लिए बुलाया गया, दस्तावेज मंगवाए गए, लेकिन जॉइनिंग के समय उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर मना कर दिया गया।

बस्ती शेख की निवासी गरजोया के अनुसार, उन्होंने करीब दो महीने पहले अस्पताल में नौकरी के लिए आवेदन किया था। उनका आरोप है कि उस दौरान दीपक नामक एक कर्मचारी ने उनका मोबाइल नंबर लिया और नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
लेकिन बाद में कथित तौर पर आपत्तिजनक संदेश भेजने शुरू कर दिए। इससे आहत होकर उन्होंने उस समय काम करने से मना कर दिया।
प्रबंधन बदला, फिर मिला बुलावा
गरजोया का दावा है कि कुछ समय बाद अस्पताल के प्रबंधन में बदलाव हुआ और उन्हें दोबारा नौकरी के लिए बुलाया गया। मंगलवार को उन्हें हाउसकीपिंग इंचार्ज द्वारा दस्तावेजों सहित बुलाया गया।
शुरुआती बातचीत में उन्हें वॉशरूम क्लीनिंग का काम सौंपने की बात कही गई, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।गरजोया ने कहा कि वे समाज में सम्मान के साथ जीवन जीना चाहती हैं और किसी भी प्रकार का छोटा-बड़ा काम करने को तैयार हैं।
“यहां किन्नर काम नहीं कर सकते” — गंभीर आरोप
गरजोया का आरोप है कि जब वे जॉइनिंग के लिए पहुंचीं तो स्टाफ ने यह कहकर बाहर कर दिया कि वैकेंसी नहीं है। उनका दावा है कि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि अस्पताल के माहौल में किन्नर काम नहीं कर सकते।
उन्होंने इसे सीधे तौर पर पहचान के आधार पर भेदभाव और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। गरजोया ने ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए कहा कि कानून उन्हें किसी भी संस्थान में बिना भेदभाव के रोजगार का अधिकार देता है।
गरजोया ने समाज की दोहरी मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर हम सड़कों पर भीख मांगते हैं तो लोग हमें तिरस्कार से देखते हैं, और जब हम योग्यता के आधार पर नौकरी करना चाहते हैं तो हमें दरवाजे से लौटा दिया जाता है।”
पुलिस कार्रवाई की चेतावनी, प्रशासन मौन
गरजोया का कहना है कि उनके साथ इस तरह की घटना दूसरी बार हुई है और अब वे चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से शिकायत करने की चेतावनी दी है। साथ ही आरोप लगाया कि अस्पताल का निचला स्टाफ मनमानी करता है और उच्च अधिकारियों तक सही जानकारी नहीं पहुंचने देता।
इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला एक बार फिर कार्यस्थलों पर समान अवसर और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
