AAP Politics: तो काट दिए राघव चड्ढा के पर? ‘Parliament’ में अब नहीं मिलेगा मौका! अशोक मित्तल को मिला उप-नेता पद… 2027 पर नजर
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पंजाब हॉटमेल, नई दिल्ली/जालंधर। Aam Aadmi Party (AAP) ने राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए Raghav Chadha को डिप्टी लीडर (उपनेता) पद से हटा दिया है।

पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेज दिया है।सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने सचिवालय को यह भी सूचित किया है कि राघव चड्ढा को अब सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए।

इस कदम को राजनीतिक गलियारों में अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं जालंधर से सांसद Ashok Mittal को राज्यसभा में AAP का नया उपनेता नियुक्त किया गया है। पार्टी ने पत्र के जरिए अशोक मित्तल के नाम की औपचारिक जानकारी भी सचिवालय को दे दी है।
इस फैसले के बाद AAP की संसदीय रणनीति और आंतरिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया है कि राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल उपनेता की जिम्मेदारी संभालेंगे। अशोक मित्तल, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर भी हैं, पार्टी के एक अनुभवी चेहरे माने जाते हैं।

राघव चड्ढा के पर कतरे?
राघव चड्ढा को लेकर पार्टी ने न केवल उन्हें पद से हटाया है, बल्कि सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। आमतौर पर किसी वरिष्ठ सांसद के लिए इस तरह का निर्देश पार्टी की आंतरिक कलह या किसी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई का संकेत माना जाता है।
राघव चड्ढा लंबे समय से राज्यसभा में AAP की बुलंद आवाज रहे हैं, ऐसे में इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं।
पार्टी की रणनीति में बदलाव
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘आप’ अपनी संसदीय टीम को नए सिरे से संगठित करने की कोशिश कर रही है। अशोक मित्तल को आगे लाना पार्टी की पंजाब और शिक्षा जगत से जुड़ी अपनी छवि को और मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, राघव चड्ढा को बोलने से रोकने का फैसला यह दर्शाता है कि पार्टी हाईकमान और उनके बीच तालमेल में कहीं न कहीं कमी आई है।
पार्टी के फैसले चलते रहते हैं: सीएम मान
पार्टी की नीतियां चलती रहती हैं। जब हम चार चुने गए तो धर्मवीर गांधी को लीडर बनाया गया था। उसके बाद मुझे नेता बनाया गया था। यह पार्टी के फैसले हैं तो चलते रहते है।
फूलका संबंधी सवाल पर उन्होंने हाकि जिस पार्टी ने एमएलए और एलओपी बनाया है। उस समय पार्टी बहुत ठीक है। जब दूसरी जगह जाना होता है तो पार्टी मे दम घुटता है। पार्टी बदलने के समय पंजाब के हितों के लिए गए हैं।
एक बार उनसे पूछ लेना चाहिए जो उनसे पहले गए है। उनसे पूछ ले कि हालत क्या किए है। इसलिए मैं गुडलक ही कहूंगा
