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श्रीमद् भागवत कथा चतुर्थ दिवस: कथा में बही दिव्य भक्ति की धारा, कृष्ण जन्मोत्सव ने बांधा समा; झूमे श्रोता

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जब भक्त शरणागत होता है, तब भगवान उसके सभी दुखों का नाश कर देते हैं: आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी

पंजाब हॉटमेल, जालंधर। साई दास स्कूल ग्राउंड, पटेल चौक में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस की कथा में परम श्रद्धेय आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने भक्त और भगवान के मधुर, अनन्य एवं अद्वितीय संबंध की दिव्य महिमा को बड़े ही भावपूर्ण और रसपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

आचार्य श्री ने कहा कि “भक्त के विश्वास को पूर्ण करने वाले स्वयं प्रभु ही हैं” क्योंकि भक्त की आस्था, उसके भाव और उसकी वेदना को प्रभु भली-भांति जानते हैं। संसार के सामने दुख रखने से किसी को कुछ नहीं मिलता—जीव को अपने कष्ट प्रभु के चरणों में अर्पित करने चाहिए।

जब भक्त शरणागत होता है, तब भगवान उसके सभी दुखों का नाश कर देते हैं। कथा में उन्होंने प्रहलाद महाराज का पावन प्रसंग सुनाते हुए बताया कि हिरण्यकशिपु द्वारा दी गई भीषण यातनाओं—विष पिलाना, हाथी से कुचलवाना, अग्नि में जलाना—के बावजूद प्रहलाद जी को तनिक भी पीड़ा नहीं हुई, क्योंकि उनका विश्वास अपने प्रभु में अडिग था।

इसी अटूट भक्ति की रक्षा हेतु भगवान नृसिंह खंभ से प्रकट हुए। यह सिद्ध करता है कि भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए समय और स्थान से परे होकर भी प्रकट हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जीव को निंदा और स्तुति से दूर रहना चाहिए तथा प्रभु के चरित्रों का श्रवण और चिंतन करना चाहिए। जैसे एक छोटी सी कुल्हाड़ी विशाल वृक्ष को काट देती है, वैसे ही प्रभु स्मरण से जीव के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। सच्चा भक्त वही है जो प्रभु की हर इच्छा, हर लीला को प्रसन्नता से स्वीकार करता है—क्योंकि प्रभु भाव के ही भूखे हैं।

आचार्य जी ने यह महत्वपूर्ण तथ्य भी साझा किया कि परमात्मा न केवल साकार हैं और न ही केवल निराकार—वे तो तदाकार हैं, यानी भक्त की इच्छा के अनुसार जिस रूप में भक्त उन्हें देखना चाहता है, परमात्मा उसी रूप में दर्शन देते हैं।

श्री कृष्ण जन्मोत्सव एवं नन्दोत्सव – भक्ति और उल्लास का भव्य पर्वचतुर्थ दिवस पर कथा स्थल सम्पूर्ण रूप से भक्ति, उल्लास और दिव्यता से सराबोर हो उठा। श्री कृष्ण जन्मोत्सव और नन्दोत्सव का आयोजन अत्यंत धूमधाम से किया गया।

प्रभु के प्रगट होने के साथ ही वातावरण “नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की” के दिव्य जयकारों से गूंज उठा।गोपियों ने प्रभु के आगमन पर शुभ बधाई सामग्री अर्पित की, व्यासपीठ पर भागवत जी पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

दीप प्रज्वलन हुआ और भक्तों ने भक्ति-भाव से ओतप्रोत प्रसाद ग्रहण किया। पूरा पंडाल कृष्ण भक्ति से भर उठा और श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को अपने हृदय में संजो लिया।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति से बढ़ा आयोजन का गौरव

इस पावन कथा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतजन, सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इनमें प्रमुख रूप से पूर्व सांसद सुशील रिंकू, सुनीता रिंकू, दिनेश ढल्ल, ज्वाइंट कमिश्नर संदीप शर्मा, डीसीपी नरेश डोगरा, एडीसीपी अक्षिता जैन, यशपाल चौधरी, अभिषेक चौधरी, प्रमोद अरोड़ा, रविंदर धीर, वास्तव एजुकेशन ग्रुप के चेयरमेन संजीव वस्ल, सुदेश विज, हरीश महेंद्रू, सुनील नय्यर,

उमेश औहरी, संजय सहगल, चंदन वडेरा, ब्रिज मोहन चड्ढा, हेमंत थापर, भूपेंद्र सिंह, मनी भैया, राजवंश मल्होत्रा, देवेंद्र अरोड़ा, रिंकू मल्होत्रा, अंकुश जुनेजा, सोनू चोपड़ा, सुमित गोयल, तरुण सरीन, जितेंद्र कुमार, बलविंदर शर्मा, अरुण मल्होत्रा, देविंदर वर्मा, नरेंद्र वर्मा और राहुल शर्मा शामिल रहे।

उनकी उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता में और अधिक वृद्धि की। श्रद्धालुओं ने कथा का रसास्वादन किया और चतुर्थ दिवस का यह दिव्य आयोजन सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया।

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