अजीबो-गरीब मामला: टिकट मांगने पर TTE को ही ट्रेन से उतार-पीट कर थाने ले गए GRP जवान… मुर्गा बनाया, कुकड़ू-कूं बुलवाया, पढ़ें और देखें

पंजाब हॉटमेल ब्यूरो। GRP Police official misbehave with TTE in train) उत्तर प्रदेश के झांसी #jhansi से बड़ी खबर सामने आई है जहां हीराकुंड एक्सप्रेस की तीसरी एसी कोच में डिप्टी CTI (TTE) दिनेश कुमार ने एक महिला से टिकट मांगा।
जिसे जीआरपी हेड कॉन्स्टेबल संदीप कुमार की पत्नी बताया गया। जब महिला टिकट नहीं दिखा सकी, तो विवाद बढ़ा और संदीप व उसके साथी गुस्से में TTE से हाथापाई करने लगे।

इस झड़प के बाद, ट्रेन ललितपुर स्टेशन पहुंची, जहां पहले से मौजूद 8–10 जीआरपी जवानों ने TTE को ट्रेन से उतारकर ललितपुर थाना ले गए। वहां उन्हें बारी-बारी पीटा गया, मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया और “मुर्गा बनाकर” प्रताड़ित किया गया।
रेलवे की प्रतिक्रिया और जांच
रेलवे प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच कमिटी का गठन किया है, जिसमें सहायक सुरक्षा आयुक्त, सहायक वाणिज्य प्रबंधक और GRP SP शामिल हैं।
GRP SP विपुल श्रीवास्तव ने बताया कि कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्यों है यह मामला महत्वपूर्ण?
पथप्रदर्शक उदाहरण: यह घटना दर्शाती है कि ऑन‑ड्यूटी रेलवे कर्मी को भी सुरक्षा का अधिकार है, और सरकारी वर्दीधारी द्वारा गैरकानूनी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जांच और जवाबदेही: तीन सदस्यीय समिति से जांच प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी होगी, जिसका निष्कर्ष दोषियों के खिलाफ मजबूत कार्रवाई में तब्दील होगा।
सिस्टम सुधार: स्पॉट पर हुई इस क्रूरता ने रेलवे और जीआरपी में बेहतर समन्वय, ट्रेन पर कानून‑व्यवस्था और टिकटिंग सिस्टम की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया।
अगला कदम क्या होगा?
1. जांच समिति की रिपोर्ट: समिति जल्द आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई का सुझाव देगी।
2. अनुशासनात्मक कार्रवाई: दोषी GRP जवानों और अधिकारियों के खिलाफ निर्धारित विभागीय और कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
3. प्रक्रिया सुधार की पहल: ऐसे हादसों से बचने के लिए ट्रेन यात्रा में GRP–रेलवे की भूमिका और प्रोटोकॉल को और स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष:टिकट मांगना और यात्रियों का कार्य निर्वहन करना TTE का अधिकार है, और इस मामले में हुई हिंसा ट्रेन यात्रा का मूलभूत सम्मान और सुरक्षा दोनों चुनौती में डालती है।
रेलवे ने तेज़ी से की गई जांच की शुरुआत के साथ साफ संदेश दे दिया है—कानून सबके लिए बराबर है।