Breaking NewsEducationचंडीगढ़जालंधरनई दिल्लीपंजाबफीचर्सराज्य समाचारविदेश में अध्ययनशिक्षा

Education Becames Now a Business… स्कूलों की मनमर्जी: 5600 रुपए में 11 बुक, कई बड़े स्कूलों में बुक-कॉपी के रेट एक नोबेल के प्राइस से ज्यादा, एक से आठवीं कक्षा के विद्यार्थी नहीं खरीद पा रहे सिलेबस

Spread the love

पत्तड़ कलां के सोशल कांवेंट इंटरनेशनल स्कूल में भी ऐसे ही हालात, मिडिल क्लास के बच्चों को नसीब नहीं हो रही किताबें… रोटी खाएं या बच्चों को पढ़ाएं समझ नहीं पा रहे अभिभावक

चोरी और सीनाजोरी, स्कूल के सेशन शुरु होने के बाद बिना किताब स्कूल पहुंचे तो क्लास से बाहर तक निकाल देने की धमकियां, बच्चों को मानसिक रूप से कर रहे प्रताड़ित

कई स्कूलों ने ऐसे रचनाकार की बुक सिलेबस में जोड़ी जो बाजार में उपलब्ध नहीं, अपने तरीके से अपने रेटों पर दे रहे

मनमोहन सिंह। पंजाब हॉटमेल

जालंधर। Education Becames Now a Business..) नए सेशन शुरू होते ही स्कूलों की मनमर्जी फिर से शुरू हो गई है, भले ही सरकार ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं लेकिन प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को कोई परवाह नहीं है। स्कूलों की मनमर्जी इस तरह चल रही है कि पुराना सिलेबस बदलकर नए तरीके से पढ़ाने की बात कह कर हजारों रुपए की बुक्स का बिल अभिभावकों को थमा रहे हैं।

स्कूलों ने ऐसे पब्लिकेशन की बुक के सिलेबस में जोड़ी है जो लोकल स्तर पर मिलती ही नहीं है और ऐसे बच्चों के हित में बताते हैं।

ऐसे ही हालात जालंधर के गांव पत्तड़ कलां में स्थित सोशल कांवेन्ट इंटरनेशनल स्कूल के भी हैं जहां सिलेबस बच्चों पर थोपा जा रहा है। स्कूल ने इस साल सेशन शुरू होते ही 1 से 5वीं कक्षा तक का सिलेबस ही बदल दिया और दिल्ली बेस्ड पब्लिकेशन की बुक से पढ़ाने की बात कह रहे हैं। स्कूल में फर्स्ट क्लास की 11 बुक्स लगभग ₹6000 की मिल रही हैं जिनकी कीमत एक नोबेल के प्राइस से भी ज्यादा है।

जब मिडिल क्लास के अभिभावक बुक्स नहीं ले पा रहे तो टीचर्स बच्चों को स्कूल ना आने की बात कह रहे हैं जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। बच्चों को एक ही बात के लिए बार-बार बोलने से उनकी तबीयत भी बिगड़ रही है। बच्चों को स्कूल की कॉपी में नहीं बल्कि बुक्स में काम दिया जाता है जिससे साफ है कि अगर बुक्स नहीं है तो पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।

वहीं, बच्चों पर पढ़ाई का बोझ भी बढ़ गया है, पब्लिकेशन बदलने से भाषा शैली बदलने के साथ सिलेबस में भी बदलाव देखेगा जबकि पहले से जिस पब्लिकेशन की बुक्स बच्चे पढ़ रहे हैं उसको समझने के बाद अब दोबारा नए सिरे से नए पब्लिकेशन को समझाना पड़ेगा। जिस पब्लिकेशन को अभी अध्यापक समझ रहे हैं वह बच्चों को कैसे समझ में आएगा।

बच्चों को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने की कवायद से जो बोझ उनके मस्तिष्क पर पड़ा है उससे उनकी क्षमता और बौद्धिक विकास के साथ उनके व्यवहार को भी बदल रहा है। बच्चे चिड़चिड़ापन का शिकार हो रहे हैं लेकिन स्कूलों प्रबंधन को इसकी परवाह रही है।

जिले के कई बड़े प्राइवेट स्कूलों में यही धंधा चल रहा है और ऐसे ही चला रहा तो मिडिल क्लास के लोग जो बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं वह खाना पीना भी छोड़ देंगे तो भी बच्चों को नहीं पढ़ा पाएंगे। स्कूल प्रबंधन के कई तरह के दावे हैं लेकिन सच्चाई इसके उलट है। स्कूल प्रबंधन की पॉलिसी क्या है इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है लेकिन बच्चों का भविष्य जरूर दांव पर लगा है।

हम लेस करके ही बच्चों को बुक्स दे रहे, बेहतर पढ़ाई के लिए पब्लिकेशन बदला: स्कूल प्रिंसिपल

सोशल कांवेन्ट इंटरनेशनल स्कूल गांव पत्तड़ कलां की प्रिंसिपल अपिंदरजीत कौर ने बातचीत में कहा कि स्कूल द्वारा बच्चों को दी जा रही बुक्स लेस प्राइस पर दे रहे हैं। पब्लिकेशन इसलिए बदला था कि बेहतर सिलेबस पाठ्यक्रम में जोड़ सके और बच्चों को नई टेक्नोलॉजी के साथ लेकर आगे बढ़े। बच्चों के पास बुक्स नहीं है उन्हें नोट्स दिए जाते हैं और एडमिशन फीस के साथ बुक्स बिल को सेटल करने के लिए ईएमआई की सुविधा भी दी है। पिछले की तुलना में नए पब्लिकेशन की बुक्स के रेट ज्यादा है पर सिलेबस भी बेहतर हुआ है। हम सभी को एक समान शिक्षा देने के लिए तत्पर है और हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं… शिकायत पर कार्रवाई होगी: डीईओ एलीमेंट्री

डीईओ एलिमेंट्री जालंधर हरजिंदर कौर ने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शेंगे नहीं। उनके पास स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत आई तो कड़ी कार्रवाई करेंगे। फीस और बुक्स के भारी भरकम बिल थमाकर बच्चों और अभिभावकों को मानसिक प्रताड़ित करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षा को व्यापार समझने वाले सुधर जाएं।

बच्चों पर मानसिक बोझ पढ़ा तो स्कूल प्रबंधन पर होगी कड़ी कार्रवाई: एडीसी जनरल

एडीसी (जनरल) जालंधर अपर्णा एम.बी. ने कहा कि बेहतर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को लूटने वाले शिक्षण संस्थान अपना रवैया बदलें। अगर बच्चों पर मानसिक दबाव डाला तो स्कूल प्रबंधन को बख्शेंगे नहीं। शिक्षा को कमाई का जरिया ना बनाएं अगर स्कूल प्रबंधन के रवैये से बच्चे या अभिभावकों को कोई परेशानी हुई तो कड़ी कार्रवाई होगी। अगर कोई स्कूल अपनी मनमर्जी कर रहा है तो उसकी शिकायत शिक्षा विभाग या उनके कार्यालय में आकर कर सकते हैं तुरंत कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रबंधन मनमर्जी से बुक्स के रेट ना लगाएं बल्कि बच्चों की जरूरत को समझें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *