सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस की कमान, भूपेश बघेल हटाए गए! इन नेताओं ने दी बधाई
गुटबाजी के गढ़ में अब एकजुटता की परीक्षा; बगावत थामना और चुनाव से पहले संगठन मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती
मनमोहन सिंह, पंजाब हॉटमेल (चंडीगढ़)। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। पार्टी ने भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया है।

उनकी जगह सचिन पायलट को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। बघेल को अब असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस के इस बदलाव को पंजाब में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सचिन पायलट तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

चन्नी-वड़िंग खेमों के बीच संतुलन बनाना होगी पहली परीक्षा
पायलट को पंजाब की कमान ऐसे समय मिली है जब प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से जुड़े खेमों के बीच मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
भूपेश बघेल ने पिछले महीनों में दोनों पक्षों के नेताओं से मुलाकात कर विवादों को सुलझाने और संगठन में तालमेल कायम करने का प्रयास किया था। हालांकि, उनके प्रयासों के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
ऐसे में पायलट के सामने सबसे पहली चुनौती अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाकर पार्टी में भरोसा बहाल करने की होगी।
ये रहेंगी नए प्रभारी के सामने बड़ी चुनौतियां
गुटबाजी खत्म करना सबसे अहमपंजाब कांग्रेस के अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना पायलट की सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्हें चन्नी समर्थक नेताओं, वड़िंग समर्थक नेताओं और अन्य वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना होगा।
टिकट वितरण, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर संभावित मतभेदों को समय रहते नियंत्रित करना उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी।
बूथ स्तर तक संगठन को करना होगा सक्रिय
विधानसभा चुनाव नजदीक होने के साथ कांग्रेस के सामने अपने जमीनी संगठन को मजबूत करने की चुनौती भी है। आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले के लिए कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत ढांचा तैयार करना होगा।
पायलट को वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ विधायकों, पूर्व विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल कायम करना होगा।
नेताओं की नाराजगी दूर कर एक मंच पर लाना
पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही खींचतान को समाप्त करने के लिए पायलट को संवाद और समन्वय पर जोर देना होगा। चुनाव से पहले संगठन में किसी भी तरह की बगावत या असंतोष कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
बघेल ने हाईकमान को सौंपी थी रिपोर्ट
भूपेश बघेल के कार्यकाल में ही पंजाब कांग्रेस के भीतर मतभेद कई मौकों पर खुलकर सामने आए थे। जुलाई में नेताओं से बातचीत के बाद बघेल ने कांग्रेस हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय उन्होंने तत्काल नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया था।
अब प्रभारी बदले जाने के बाद सचिन पायलट को बघेल की रिपोर्ट और पिछले महीनों में सामने आए विवादों की पृष्ठभूमि में आगे की रणनीति तैयार करनी होगी।
हाईकमान ने प्रभारी का चेहरा जरूर बदल दिया है, लेकिन पार्टी को एकजुट कर चुनावी मैदान में मजबूत स्थिति में लाना अब पायलट की असली परीक्षा होगी।
पायलट को बधाई, नेताओं ने जताया भरोसा
वड़िंग और रंधावा ने एक्स पर पोस्ट कर दी शुभकामनाएंसचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उन्हें बधाई दी। दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट का अनुभव, कुशल नेतृत्व और जनता से जुड़ाव पंजाब में कांग्रेस संगठन को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा।
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि सचिन पायलट की ऊर्जा और कार्यकुशलता विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में निश्चित रूप से नया जोश भरने का काम करेगी।
अब नजर पायलट की रणनीति पर
प्रभारी बदलने के साथ पंजाब कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर है। हालांकि, केवल नेतृत्व परिवर्तन से संगठन की अंदरूनी चुनौतियां खत्म होना आसान नहीं होगा।
पायलट को एक ओर वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधना होगा, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर चुनावी मशीनरी को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा।
पंजाब कांग्रेस को गुटबाजी से निकालकर एकजुट चुनावी ताकत में बदल पाना ही सचिन पायलट के कार्यकाल की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
