Jalandhar Gymkhana Club Election : क्या निष्पक्ष होंगे? उम्मीदवारों पर इतना दबाव पहली बार दिखा, राजनीति हावी!
क्लब का माहौल सुधारने के लिए चुनाव वर्चस्व की लड़ाई बन गए, क्या आपसी सौहार्द खत्म होता जा रहा
लोकतंत्र में डरा-धमका कर जीत तानाशाही दर्शाती है, परंपरा बचाए रखने के लिए प्रोग्रेसिव ने उतारे उम्मीदवार- कमल शर्मा कोकी
मनमोहन सिंह
पंजाब हॉटमेल, जालंधर। जालंधर जिमखाना क्लब (Jalandhar Gymkhana Club)के इतिहास में कुछ चीजें पहली बार होने जा रही हैं, जिसमें सबसे युवा प्रत्याशी हों या चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान। इस बार सदस्यों ने वह सब देखा है जो अब-तक के इतिहास में नहीं हुआ।

सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस बार चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष होगी या फिर राजनीतिक दबाव में सबकुछ खत्म हो जाएगा। पहले चुनावी प्रक्रिया की घोषणा, फिर मतगणना की तारीख, सदस्यों को डरा-धमका कर बैठा देना या अपनी तरफ मिला लेना इस बार सबकुछ देखने को मिला।
वहीं प्रोग्रेसिव ग्रुप ने लोकतंत्र को जिंदा रखते हुए चुनाव मैदान में कदम रखा, भले ही कई सदस्यों को डराया गया हो पर वह पीछे नहीं हटे।
इस बार वर्चस्व की लड़ाई इस कदर हाबी है कि जिमखाना क्लब के सदस्य सीधे ग्रुप के लोगों का समर्थन करते नहीं दिख रहे। जिसका सबसे बड़ा कारण राजनीतिक द्वेष भी है, लोग वोट किसे देंगे ये तो 30 अगस्त को पता चलेगा लेकिन रुझान कैंसे हैं ये 8 दिन तय करेंगे।
प्रशासन पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की बात कह रहा है पर दबाव साफ दिख रहा है। ये पहली बार है कि उम्मीदवार हों या सदस्य, सभी पर इतना दबाव पहली बार दिख रहा है।
क्लब के कार्यकाल में इतिहास में कभी उम्मीदवार हों या सदस्य, इतने डरे हुए नहीं दिखे। प्रोग्रेसिव ग्रुप के कमल शर्मा कोकी कहते हैं कि लोकतंत्र में डरा-धमका कर जीत तानाशाही दर्शाती है, परंपरा बचाए रखने के लिए प्रोग्रेसिव ग्रुप उम्मीदवार उतारे से पीछे नहीं हटा। नहीं तो लोकतंत्र हार जाता, अब मेंबरों को डिसाइड करना है कि वह किसका साथ देते हैं।
क्लब सदस्यों से अपील है कि वह मतदान अवश्य करें, बदलाव लाएं और क्लब में वो टीम चुनकर लाएं जो बेहतर काम कर सकती है। युवाओं और अनुभवी चेहरों से सजी प्रोग्रेसिव ग्रुप को सदस्यों के साथ की जरूरत है ताकि वह उन वादों को पूरा कर सकें जो शायद दबाव की राजनीति में कहीं गुम हो रहें हैं।
