AdministrationBreaking NewsChandigarhCityCourtFeaturedGovernmentIndiaMunicipal corporationPoliticsPunjab Governmentकपूरथलाजालंधरपंजाबराज्य समाचार

कपूरथला मेयर चुनाव पर हाईकोर्ट की बड़ी रोक, अगले आदेश तक डीसी होंगे नगर निगम के प्रशासक

Spread the love

Punjab Hotmail, कपूरथला/चंडीगढ़। कपूरथला नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। विधायक राणा गुरजीत सिंह और 26 पार्षदों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मेयर पद पर फिलहाल रोक लगा दी है।

साथ ही उपायुक्त आकाश बंसल को अगले आदेश तक नगर निगम का प्रशासक (Administrator) नियुक्त किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

चुनाव प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड तलब

जस्टिस दीपक सिब्बल और जस्टिस रुपिंदर चाहल की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए 8 जुलाई को हुई नगर निगम की पहली बैठक की पूरी कार्यवाही, रिकॉर्ड और वीडियो रिकॉर्डिंग अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

बहुमत के बावजूद मौका न मिलने का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल, अजय चड्ढा और कुणाल मूलवानी ने अदालत को बताया कि 26 मई 2026 को हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस और उसके समर्थित उम्मीदवारों को 50 में से स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ था।

निगम में विधायक सहित कुल 51 मतदाता हैं, जिनमें कांग्रेस के 27 और सत्तापक्ष व उसके समर्थित 24 सदस्य शामिल हैं।

पहली बैठक में देरी और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के बावजूद पहली बैठक समय पर नहीं बुलाई गई।

दावा किया गया कि बहुमत वाले पार्षदों पर दबाव बनाने और विरोध करने वालों को कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने के उद्देश्य से बैठक में देरी की गई।

मतदान कराए बिना मेयर घोषित करने का आरोप

याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 8 जुलाई को बैठक तो बुलाई गई, लेकिन शपथ ग्रहण के बाद केवल 24 पार्षदों वाले समूह को संबोधित किया गया।

बहुमत वाले 27 पार्षदों को अपना उम्मीदवार प्रस्तावित करने या मतदान में भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद अधिकारी ने मेयर के निर्वाचित होने की घोषणा कर दी और बैठक समाप्त कर दी।

वीडियोग्राफी पर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं कराया गया।

साथ ही, प्रशासन के निर्देशों के बावजूद पूरी बैठक की वीडियोग्राफी नहीं की गई और केवल कुछ हिस्सों की ही रिकॉर्डिंग की गई। अब पूरे मामले पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद सामने आएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *