बड़ी खबर: H-1B वीजा पर ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, अदालत ने सुनाया यह फैसला; भारतीय पेशेवरों को मिली बड़ी राहत!
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Punjab Hotmail, वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में नौकरी और करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है।

अमेरिकी संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बोस्टन की संघीय अदालत के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि संघीय सरकार के पास इस तरह का भारी शुल्क लगाने का कोई स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं था।
इसलिए यह निर्णय अमेरिकी कानून की सीमाओं से बाहर है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया कि इस अतिरिक्त शुल्क को तुरंत निरस्त किया जाए।
यह फैसला भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और अन्य उच्च कौशल वाले कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका में H-1B वीजा के तहत काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। ऐसे में इस शुल्क के हटने से हजारों भारतीयों और उन्हें नियुक्त करने वाली अमेरिकी कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने सितंबर में नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने की घोषणा की थी। इस फैसले के खिलाफ 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
उनका तर्क था कि इतनी बड़ी फीस विदेशी प्रतिभाओं के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद करने जैसी होगी और इससे कंपनियों के लिए कुशल कर्मचारियों की भर्ती करना बेहद महंगा हो जाएगा।
H-1B वीजा अमेरिका का सबसे लोकप्रिय कार्य वीजा कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को काम करने की अनुमति दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला न केवल भारतीय पेशेवरों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता को भी बनाए रखने में मदद करेगा।
इस फैसले के बाद भारतीय आईटी सेक्टर और अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच खुशी की लहर है।
माना जा रहा है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को भी उच्च कौशल वाले कर्मचारियों की भर्ती में आसानी होगी और वैश्विक प्रतिभाओं के लिए अवसर पहले की तरह खुले रहेंगे।
