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बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट: नीतीश के इस्तीफे के बाद भाजपा सीएम पर सस्पेंस, शिवराज ‘पर्यवेक्षक’ की भूमिका में

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पंजाब हॉटमेल, बिहार/नई दिल्ली। Bihar की राजनीति में आज ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है। करीब 25 वर्षों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले Nitish Kumar इस्तीफा देने जा रहे हैं, जिससे राज्य में पहली बार Bharatiya Janata Party (भाजपा) का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है।

नए चेहरे की घोषणा आज शाम तक संभव है, हालांकि सस्पेंस कल तक भी खिंच सकता है। भाजपा सीएम पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary बताए जा रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व क्या फैसला करता है।

2020 की यादें: जब राजनाथ बने थे ‘निर्णायक’

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा जदयू से बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। तब भी सत्ता गठन के समय बड़ा राजनीतिक ‘खेल’ हुआ था। Rajnath Singh को दिल्ली से पटना भेजा गया था।

नीतीश कुमार की शर्त थी कि डिप्टी सीएम Sushil Kumar Modi ही हों, लेकिन भाजपा ने नया प्रयोग करते हुए उनकी जगह Tarkishore Prasad और Renu Devi को उपमुख्यमंत्री बनाया। उस समय राजनाथ सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी।

अब शिवराज सिंह चौहान ‘पर्यवेक्षक’ की भूमिका में

इस बार केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan को भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के लिए पटना भेजा गया है।

माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान नाम तय कर चुका है और शिवराज सिंह उसी पर विधायक दल की मुहर लगवाएंगे—ठीक वैसे ही जैसे 2020 में राजनाथ सिंह ने किया था।

विधायक दल की बैठक में क्या होगा?

मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। भाजपा के 88 विधायक (एक इस्तीफे के बाद) नए नेता के चुनाव में हिस्सा लेंगे। बैठक में विधान पार्षद और वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

भाजपा में आमतौर पर खुला विरोध नहीं होता, लेकिन लगभग 20 नामों की चर्चा के चलते सियासी हलचल तेज है। ऐसे में प्रदेश कार्यालय और प्रमुख नेताओं की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहार को उसका पहला भाजपाई मुख्यमंत्री कौन मिलता है—सम्राट चौधरी या कोई नया चेहरा?

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