जिला कांग्रेस शहरी सूची पर बवाल: स्पेशल इनवाइटी पदों से बढ़ी अंदरूनी खींचतान, दिग्गज नेताओं ने पद लेने से किया इंकार… पढ़ें
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पंजाब हॉटमेल, जालंधर (मनमोहन सिंह)। Indian National Congress की पंजाब इकाई में उस समय हलचल मच गई जब प्रदेश प्रधान Amrinder Singh Raja Warring द्वारा जालंधर जिला कांग्रेस शहरी के 51 पदाधिकारियों की सूची जारी की गई।

सूची सामने आते ही संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया, खासकर 5 स्पेशल इनवाइटी पदों को लेकर विवाद गहरा गया है। सूची जिला प्रधान राजिंदर बेरी की सिफारिश पर जारी हुई थी, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुद को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जालंधर जैसे अहम शहर में संगठनात्मक असंतोष पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
पवन कुमार ने ठुकराया पद, राजा वडिंग को लिखा पत्र
तीन बार निर्विरोध पार्षद रह चुके पवन कुमार ने स्पेशल इनवाइटी पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने प्रदेश प्रधान को पत्र लिखकर इसे “डिमोशन” बताया और कहा कि उन्हें सूची की जानकारी अखबारों से मिली, जो संगठन में पारदर्शिता की कमी दर्शाता है।

पवन का कहना है कि वर्षों की मेहनत और वरिष्ठ उपप्रधान के तौर पर निभाई गई जिम्मेदारियों के बाद उन्हें सीमित भूमिका देना उनके योगदान का अपमान है।
शैरी चड्ढा का भी विरोध, “1-2 दिन में बड़ा फैसला”
पार्षद परमजीत सिंह शैरी चड्ढा ने भी स्पेशल इनवाइटी पद पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने लगातार दो चुनाव जीते और कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।

शैरी ने दावा किया कि उन्हें सत्तारूढ़ दल की ओर से पद और प्रलोभन दिए गए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी। इसके बावजूद उन्हें सीमित भूमिका देना “वफादारी का सम्मान नहीं” है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले 1-2 दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला हो सकता है।
सुदेश भगत बोले- “सीनियर नेताओं को साइडलाइन किया”
जिला कांग्रेस शहरी के पूर्व उपप्रधान सुदेश कुमार भगत ने भी सूची का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीनियर और मेहनती नेताओं को दरकिनार कर गुटबाजी को बढ़ावा दिया गया है।
भगत के मुताबिक सूची तैयार करते समय पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ क्षेत्रों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी हाईकमान ने समय रहते असंतुष्ट नेताओं को नहीं मनाया तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
हाईकमान के लिए चुनौती
जालंधर में बढ़ता असंतोष प्रदेश नेतृत्व के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रदेश प्रधान और हाईकमान इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।
