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‘Supreme Court’ का बड़ा फैसला: धर्म परिवर्तन करते ही खत्म हो जाएगा…! पढ़ें सख्त टिप्पणी

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पंजाब हॉटमेल, नई दिल्ली। Supreme Court of India ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का संवैधानिक दर्जा खो देता है।

अदालत ने Andhra Pradesh High Court के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत यह प्रावधान स्पष्ट है।

क्या था मामला?

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी (Pastor) के रूप में कार्य कर रहा था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत केस दर्ज कराया था।

आरोपियों ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ईसाई धर्म अपना चुका है, इसलिए वह एससी-एसटी कानून के तहत संरक्षण पाने का पात्र नहीं है। 30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा था कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है।

इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति एससी-एसटी एक्ट के लाभ का दावा नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट की धाराएं हटाने का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि अपीलकर्ता एक दशक से अधिक समय से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है और पादरी के रूप में कार्यरत है।

वह नियमित रूप से प्रार्थना सभाएं आयोजित करता रहा है, जिससे यह सिद्ध होता है कि घटना के समय वह ईसाई धर्म का अनुयायी था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान (SC) आदेश 1950 के तहत निर्दिष्ट धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।

यह फैसला धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े कानूनी अधिकारों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

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