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पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: ‘अनिवार्य नीति से घट सकते हैं महिलाओं के रोजगार अवसर’… आया यह फैसला! पढ़ें

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पंजाब हॉटमेल, न ई दिल्ली। देशभर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश (पीरियड्स लीव) को अनिवार्य बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यदि इस तरह की छुट्टी को कानून के जरिए अनिवार्य किया जाता है, तो इसके सामाजिक और पेशेवर प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी नीति अनजाने में लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकती है। पीठ ने यह आशंका जताई कि यदि नियोक्ताओं को लगे कि महिलाओं को अतिरिक्त अनिवार्य अवकाश देना होगा, तो वे भर्ती के समय महिलाओं को प्राथमिकता देने से कतराने लग सकते हैं।

इससे महिलाओं के रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि मासिक धर्म को किसी कमजोरी, अक्षमता या हीनता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की गरिमा और समान अवसरों की रक्षा करना आवश्यक है, और कोई भी नीति बनाते समय उसके व्यापक प्रभावों पर विचार करना जरूरी है।

यह जनहित याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें देशभर में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए एक समान राष्ट्रीय मासिक धर्म अवकाश नीति लागू करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. आर. शमशाद ने दलील दी कि केरल सहित कुछ राज्यों और कई निजी संस्थानों ने स्वैच्छिक रूप से इस दिशा में कदम उठाए हैं और महिलाओं को राहत प्रदान की जा रही है।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्वैच्छिक रूप से दी जाने वाली सुविधाएं सराहनीय हैं, लेकिन जब किसी नीति को कानून के जरिए अनिवार्य बनाया जाता है, तो उसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिणामों का आकलन करना आवश्यक हो जाता है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही संबंधित अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दे चुके हैं, इसलिए इस विषय पर नीति निर्माण का निर्णय कार्यपालिका के स्तर पर लिया जाना अधिक उपयुक्त है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे पर दिए गए प्रतिनिधित्व पर विचार करें और सभी हितधारकों से परामर्श के बाद उचित निर्णय लें।

इस टिप्पणी के साथ ही देश में पीरियड्स लीव को लेकर चल रही बहस को नई दिशा मिल गई है।

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