आबकारी नीति केस में बढ़ी कानूनी जंग: CBI के बाद ED ने भी दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, सभी पक्षों को नोटिस; इस दिन सुनवाई!
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पंजाब हॉटमेल, नई दिल्ली/चंडीगढ़। दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में अब कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी के आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।

ईडी ने अपनी याचिका में मांग की है कि उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए, क्योंकि ये बिना एजेंसी का पक्ष सुने और तथ्यों की समुचित जांच किए की गई हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ कर रही है। ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने एजेंसी की भूमिका को लेकर एकतरफा और कठोर टिप्पणी की, जबकि संबंधित मामले में ईडी का सीधा सरोकार नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने एजेंसी को सुनवाई का अवसर दिए बिना गंभीर अवलोकन दर्ज कर दिए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
इसी आदेश के खिलाफ CBI पहले ही हाईकोर्ट पहुंच चुकी है, जिस पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे। अब ED की याचिका को भी उसी मामले के साथ जोड़ दिया गया है और दोनों याचिकाओं पर 16 मार्च को संयुक्त सुनवाई होगी।
ईडी ने अपनी अर्जी में कहा है कि 27 फरवरी का आदेश न्यायिक सीमा से परे जाकर दिया गया है और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
एजेंसी का तर्क है कि उसकी जांच स्वतंत्र रूप से चल रही है और ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।
अब सभी की नजरें 16 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हाईकोर्ट यह तय करेगा कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां बरकरार रहेंगी या उन्हें हटाया जाएगा।
इस फैसले का असर न केवल इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पड़ेगा, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
